शौचालय निर्माण से पीछे हटी सरकार

Tuesday, November 3, 2015 - 09:25

रायपुर, पत्रिका। स्वच्छ भारत मिशन के तहत पूरे देश में निजी और सामुदायिक शौचालय निर्माण की कवायद शुरू हो गई है। वहीं, छत्तीसगढ़ में निजी और सामुदायिक शौचालय निर्माण का लक्ष्य तय होने के बाद सरकार अब सामुदायिक शौचालय निर्माण से पीछे हट रही है। इसके पीछे प्रमुख वजह शौचालय के संचालन में भ्रष्टाचार की शिकायतें और रख-रखाव की व्यवस्था को माना जा रहा है।

 

मुख्य सचिव विवेक ढांड की अध्यक्षता में स्वच्छ भारत मिशन के लिए गठित हाईपावर स्टेयरिंग कमेटी की पहली बैठक में निजी और सामुदायिक शौचालय के निर्माण पर लम्बी चर्चा हुई थी। इसमें अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया था कि जहाँ तक सम्भव हो निजी शौचालय का निर्माण ही कराया जाए। जमीन और पानी नहीं मिलने की स्थिति में ही अन्तिम विकल्प के रूप में सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया जाए। गौरतलब है कि शहर की आबादी के हिसाब से पहले की सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया गया है। इसके संचालन का जिम्मा सुलभ इंटरनेशनल नामक संस्था को दिया गया है। हालाँकि, निगम प्रशासन अपनी ओर से इसका बिजली का बिल भी नहीं लेती है। इसके बाद इस संस्था के खिलाफ कई तरह की शिकायतें सामने आईं हैं। मुख्यमन्त्री और मुख्य सचिव से शिकायत के बाद इसकी जाँच भी हुई है। हालाँकि, अभी तक जाँच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है।

 

ऐसे होना था शौचालय का निर्माण

 

3 लाख से अधिक जनसंख्या वाले निगमों में

52 सीटर

समस्त नगर निगमों में

38 सीटर

नगर पालिका परिषदों में

26 सीटर

समस्त नगर निगमों में

20 से 10 सीटर

 

नहीं सुधर रहे अधिकारी

 

शौचालयों का निर्माण केन्द्र और राज्य सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। इसके बाद भी अधिकारी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। यही वजह है कि शासन ने पहले 36 और फिर 15 अक्टूबर की समीक्षा बैठक के बाद 37 नगर पालिका व नगर पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को नोटिस जारी किया था। वहीं, अंबागढ़ चौकी, धमधा, पाटन, साजा, थानखम्हरिया, डोंगरगाँव, उतई, गौरेला, पाली और लैलूंगा में शौचालय निर्माण की प्रगति की वजह से प्रशंसा भी की गई थी।

 

1 लाख 69 हजार शौचालय का लक्ष्य

 

चालू वित्तीय वर्ष 2015-16 में कुल एक लाख 69 हजार 637 शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य है, जिसके लिए प्रदेश के 169 नगरीय निकायों को 313 करोड़ 59 लाख का आवंटन किया जा चुका है। इसमें नगर निगमों को 59 हजार 391, नगर पालिका परिषदों को 55 हजार 673 और नगर पंचायतों को 54 हजार 753 शौचालय का निर्माण कराना था।

 

साभार : राजस्थान पत्रिका 3 नवम्बर 2015

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