बच्चों ने सम्भाली स्वच्छता की कमान

Tuesday, October 20, 2015 - 16:50

राजु कुमार

 

बघवाड़ गाँव की शासकीय प्राथमिक शाला में प्रवेश करते ही फूल-पौधों से सजी क्यारियाँ, एक तरफ बड़े-बड़े पेड़, स्वच्छता एवं साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था देखकर लगता है कि सभी शालाएँ ऐसी ही होनी चाहिए। यहाँ बच्चों को बेहतर शिक्षण के साथ-साथ बेहतर वातावरण और मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध है। यहाँ साफ-सफाई ऐसी है कि कहीं कोई कचरा नहीं दिखता। ‘‘मेरे स्कूल में बालक और बालिका के लिए अलग-अलग शौचालय है। हाथ धोने के लिए प्लेटफॉर्म, पेयजल के लिए टंकी और कचरा डालने के लिए कई डिब्बे हमारे स्कूल में हैं। हमारा बाल कैबिनेट सभी बच्चों के साथ मिलकर स्कूल की साफ-सफाई पर ध्यान देता है। हमारे स्कूल में कहीं गन्दगी नहीं दिखेगी और न ही कहीं कचरा दिखाई देगा।’’ 5वीं के छात्र नीलेश अग्रवाल ने आत्मविश्वास के साथ यह बात बताई।

 

बघवाड़ ग्राम पंचायत मध्यप्रदेश के हरदा जिले के टिमरनी विकासखण्ड से लगभग 10 किलोमीटर दूर है। एक ग्रामीण इलाके में इतनी व्यवस्थित प्राथमिक शाला बहुत ही मुश्किल से दिखती है। स्कूल की 5वीं की छात्रा शिवानी धनकर बताती है, ‘‘मेरे स्कूल में कचरा प्रबंधन के लिए बहुत ही बेहतर व्यवस्था है। हमने अलग-अलग कई डिब्बे रखे हैं, जिसमें एक डिब्बा टूटे-फूटे काँच डालने के लिए, एक डिब्बा पलास्टिक के कचरे के लिए और एक डिब्बा लोहे के छोटे-बड़े टुकड़े डालने के लिए रखा है। हमारे स्कूल में जैविक खाद के लिए सीमेंट की एक टंकी है, जिसमें पेड़-पौधों की पत्तियाँ एवं सूखी लकड़ियाँ डालते हैं।’’ हेमंत पाटिल बताता है, ‘‘हमारे यहाँ से उपयोग किया हुआ पानी बाहर नाले में नहीं जाता। उस पानी को स्कूल में लगाए गए पेड़-पौधों की ओर नाली बनाकर बहाते हैं, जिससे उनकी सिंचाई हो जाती है।’’ सुबह स्कूल लगने से पहले और मध्याह्न भोजन के बाद के समय में बच्चे साफ-सफाई का निरीक्षण करते हैं। शौचालय की सफाई के लिए पंचायत का सफाईकर्मी आता है।

 

यूनिसेफ, मध्यप्रदेश के कार्यक्रम प्रबंधक श्री मनीष माथुर कहते हैं, ‘‘बाल अधिकारों के तहत जब हम शिक्षा के अधिकार की बात करते हैं, तो उसमें एक सुव्यस्थित शाला का होना बहुत जरूरी है। शाला में चारदीवारी, पेयजल, खेल का मैदान एवं स्वच्छता सम्बन्धी सुविधाएँ जरूर होनी चाहिए। बघवाड़ प्राथमिक शाला में इन सारी सुविधाओं का होना बच्चों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। शाला प्रबंधन में बच्चों को महत्व देना और उनका सहयोग लेना एक अनुकरणीय उदाहरण है।’’

 

पंचायत के पूर्व सरपंच देवेन्द्र सिंह राजपूत बताते हैं, ‘‘हमने अपने गाँव को स्वच्छता के मामले में एक आदर्श गाँव बनाने का निर्णय लिया था। जब जिले में मल युद्ध अभियान चलाया गया, तब हमने प्राथमिक शाला के बच्चों को अपने पालकों को घर में शौचालय बनाने के लिए प्रेरित किया। ये बच्चे स्वच्छता के मुद्दे पर जागरूक हैं, इसलिए उन्होंने घर पर शौचालय के लिए बेहतर दबाव बनाया।’’ प्राथमिक शाला के प्रधानाध्यापक एन.पी. लोववंशी बताते हैं, ‘‘एक स्कूल को स्वच्छता के मामले में आदर्श बनाना बहुत मुश्किल काम है। शौचालयों की सफाई एवं शाला परिसर की सफाई बिना इच्छाशक्ति के सम्भव नहीं है। इस शाला के प्रति पूरे गाँव की रुचि है। यहाँ गाँव के सरपंच एवं गाँव के नौकरीपेशा परिवारों के बच्चे भी पढ़ते हैं और वे लोग शाला की निगरानी पर ध्यान देते हैं। यहाँ के बहुत सारे बच्चों का नामांकन नवोदय विद्यालय में हुआ है क्योंकि यहाँ बेहतर वातावरण के साथ-साथ बेहतर पढ़ाई पर जोर दिया जाता है।’’

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