बदबू से मुक्त हुआ स्कूल

Tuesday, September 29, 2015 - 13:27

राजु कुमार

 

‘‘मेरे स्कूल की चारदीवारी के बाहर गाँव के लोग शौच करते थे। उससे स्कूल में इतनी बदबू आती थी कि पढ़ना मुश्किल था। पानी पीने के लिए चारदीवारी के पास जाना पड़ता था, तब हम नाक पर हाथ रखकर जाते थे। हमारा पढ़ाई में मन ही नहीं लगता था। अब हमें बदबू से मुक्ति मिल गई है। गाँव के लोग अब बाहर शौच नहीं करते।’’ यह कहना है मध्यप्रदेश के हरदा जिले के शासकीय प्राथमिक शाला केलनपुर की 5वीं की छात्रा अनामिका का। अनामिका स्कूल में गठित बाल कैबिनेट में स्वास्थ्य मन्त्री हैं। स्कूल के 5वीं के छात्र हरिओम बताते हैं, ‘‘चारदीवारी के बाहर दूसरे गाँव से जोड़ने वाली मुख्य सड़क है। गाँव के लोग भी उस सड़क का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन गाँव के लोग जब वहाँ शौच करते थे, तब उस सड़क से न तो गाड़ियाँ जाती थीं और न ही लोग। दूसरे गाँव की गाड़ियाँ भी गाँव के बीच वाली सड़क से आती-जाती थीं।’’

 

यूनिसेफ, मध्यप्रदेश के प्रमुख श्री ट्रेवर डी. क्लार्क कहते हैं, ‘‘स्वच्छता का अभाव और शालाओं के पास गन्दगी बच्चों की सेहत के साथ-साथ उनके विकास के लिए बाधा है। शिक्षा के अधिकार के लिए जरूरी है कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, पर इसके साथ ही उन्हें शाला में गुणवत्तापूर्ण वातावरण भी मिलना चाहिए। अधिकांश गाँवों में शालाओं की चारदीवारी या उससे जुड़ी सड़कों के किनारे खुले में शौच दिखता है, इसलिए गाँव को खुले में शौच से मुक्त बनाना बच्चों के विकास के नजरिए से बहुत ही जरूरी है।’’

 

हरदा जिले के केलनपुर गाँव में 373 परिवार रहते हैं। गाँव के अधिकांश परिवार सम्पन्न वर्ग से हैं। उन्होंने बड़े-बड़े घर बनाये पर शौचालय नहीं बनाया। शौच के लिए अधिकांश परिवार गाँव के स्कूल से सटी सड़क एवं उसके पास के नाले का उपयोग करते थे। ग्रामीणों के साथ-साथ यह बच्चों के लिए भी परेशानी का कारण बना हुआ था। दिन भर बच्चों को शौच की बदबू झेलनी पड़ती थी। पंचायत सचिव जयनारायण गौर बताते हैं, ‘‘गाँव के अधिकांश लोग सम्पन्न हैं, जो शौचालय बना सकते हैं। इसके साथ ही पात्र लोगों को सरकारी मदद भी दी जा रही थी। इसके बाद भी लोगों की सोच में परिवर्तन नहीं आ रहा था। जब गाँव को तय समय में खुले में शौच से मुक्त करने का निर्णय पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने लिया, तब मल युद्ध की टीम बनाकर सुबह 4 बजे से निगरानी की जाने लगी। चूँकि खुले में शौच से बच्चों को ज्यादा परेशानी थी, तो उन्होंने इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। लोगों को बार-बार रोकने के कारण झड़पें भी हुईं, पर अन्त में वे बच्चों की परेशानी और खुले में शौच के नुकसान से सहमत हुए और शौचालय बनाने लगे।’’

 

गाँव के अधिकांश परिवार सम्पन्न वर्ग से हैं। उन्होंने बड़े-बड़े घर बनाये पर शौचालय नहीं बनाया। शौच के लिए अधिकांश परिवार गाँव के स्कूल से सटी सड़क एवं उसके पास के नाले का उपयोग करते थे। ग्रामीणों के साथ-साथ यह बच्चों के लिए भी परेशानी का कारण बना हुआ था। दिन भर बच्चों को शौच की बदबू झेलनी पड़ती थी।

 

सरपंच ज्वाला सिंह कहते हैं, ‘‘गाँव में अधिकांश लोगों ने शौचालय बनाने में अपना पैसा भी लगाया है। शासन की मदद के अलावा 25 से 30 हजार रुपए लगाकर ग्रामीणों ने शौचालय एवं बाथरूम अलग-अलग बनाया है। उसमें टाइल्स लगाने के अलावा कई ने टंकियाँ भी लगाई हैं। सेप्टिक टैंक वाले इन शौचालयों में लोगों ने पानी के लिए नल भी लगाए हैं। कई संयुक्त परिवारों ने एक सेप्टिक टंकी बनाकर उससे दो शौचालय एवं दो बाथरूम बनाए हैं, जिससे कि उसकी लागत कम आए और वह दो परिवारों के लिए उपयोगी हो। चूँकि गाँव में पानी की कमी नहीं है, इसलिए शौचालय या बाथरूम में उपयोग के लिए पानी की कमी नहीं होती।’’ खुले में शौच से मुक्त होने की घोषणा होने के बाद ग्राम सभा ने यह तय किया कि यदि कोई खुले में शौच जाएगा, तो उसका नाम पंचायत के सूचना पट्ट पर लिखा जाएगा और 100 रुपए जुर्माना भी लिया जाएगा।

 

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री षणमुख प्रिया मिश्रा कहती हैं, ‘‘केलनपुर गाँव को खुले में शौच से मुक्त कराना बहुत मुश्किल था। यहाँ पैसे की कमी नहीं बल्कि सोच की कमी थी। पर जब लोगों में बदलाव आया, तो उन्होंने आदर्श तरीके से शौचालय बनाकर पूरी तरह से उसका उपयोग करना शुरू कर दिया। अब यह बदलाव दूसरे गाँवों को प्रेरित कर रहा है।’’

 

प्राथमिक शाला की शिक्षिका माधुरी लिल्हारे कहती हैं, ‘‘स्कूल के सभी बच्चे अब खुश हैं। गर्मी एवं बारिश में बदबू के कारण कई बच्चे स्कूल नहीं आते थे। हैंडपम्प के पास जाने पर उल्टी कर देते थे। मध्याह्न भोजन के समय उड़कर आने वाली मक्खियाँ अपने साथ बीमारियाँ भी लाती थी। स्कूल में साफ-सफाई का कोई मतलब नहीं था, जब पास में ही शौच का मैदान हो। पर अब ऐसी कोई परेशानी नहीं है।’’ स्कूली छात्रा कीर्ति एवं विनीता प्रार्थना के समय सभी बच्चों से जब पूछती हैं कि किसके घर के लोग शौच के लिए बाहर जाते हैं? तब सभी बच्चे एक साथ इंकार कर इस बात की पुष्टि कर देते हैं कि केलनपुर अब खुले में शौच से मुक्त गाँव बन चुका है।

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