कचरे से फिर क्यों डरता है यह दिल?

Saturday, September 12, 2015 - 16:11

नई दिल्ली, 9 सितम्बर (भाषा)। शहर के कचरा निस्तारण केन्द्रों का उपयोग अब कला की एक नई परियोजना के स्थल के रूप में किया जा रहा है। पृष्ठभूमि में लोकप्रिय फिल्मी पोस्टरों का प्रयोग कर कचरे के पुनर्चक्रण के फायदों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए ऐसा किया जा रहा है।

 

कचरे के पुनर्चक्रण के मुद्दे पर प्रकाश डालने के लिए कलाकार शैली गुप्ता, कर्मा रीसाइक्लिंग और डीआईएलवाई (दिल्ली आइ लव यू) के साथ मिलकर काम कर रही है। ‘द डर्टी पिक्चर’ नामक इस परियोजना के तहत मजाकिया लहजे में गुप्ता के बनाए गए प्रसिद्ध फिल्मों के दृश्यों की दक्षिण  दिल्ली के कम-से-कम 54 कचरा निस्तारण केन्द्रों पर लगाया गया है। इन फिल्मी दृश्यों को कचरे से जोड़ते हुए कैनवास पर उतारा गया है।

 

इसी तरह के एक पोस्टर में ‘श्री 420’ के एक रोमांटिक गाने ‘प्यार हुआ इकरार हुआ’ में कचरे के आधिपत्य वाले भविष्य को रेखांकित करते हुए राज कपूर को नरगिस को अम्लीय वर्षा से बचाते हुए दिखाया गया है और उन्हें कचरे से पटी सड़क पर चलते हुए दिखाया गया है और साथ ही गीत के बोल को बदल कर लिखा गया है ‘कचरे से फिर क्यों डरता है दिल?’

 

आयोजकों का कहना है कि यह विचार बॉलीवुड के प्रसिद्ध दृश्यों के जरिए फिल्मी तरीके से कचरा प्रबन्धन पर बहस के लिए ध्यान आकृष्ट करने को लेकर किया गया है।

 

हम लोग चाहते हैं कि अगर हम इस कचरे और इसके संग्रह और इसके निस्तारण के बारे में नहीं सोचते हैं तो हमारा शहर कैसा दिखेगा इस बारे में सोचें। कला और बॉलीवुड की तस्वीरों के माध्यम के अलावा इसे और किस तरह से किया जा सकता था।

 

कर्मा रीसाइक्लिंग के सह-संस्थापक और निदेशक अक्षत घिया ने कहा ‘प्रतिदिन भारी मात्रा में ठोस और इलेक्ट्रॉनिक कचरे को हम यह सोचे बिना फेंक देते हैं कि वो हमारे अमूल्य प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण के साथ क्या करेगा।’

 

देश में बढ़ रहे इलेक्ट्रॉनिक कचरा के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए दोस्तों द्वारा शुरू की गई यह कम्पनी अब इलेक्ट्रॉनिक कचरा या ‘ई-कचरा’ प्रबन्धन में काफी अहम साबित हो रही है। यह मोबाइल उपकरणों को फिर से खरीदती है, फिर से वितरित करती है और उसका पुनर्चक्रण करती है।

 

घिया ने कहा ‘हम लोग चाहते हैं कि अगर हम इस कचरे और इसके संग्रह और इसके निस्तारण के बारे में नहीं सोचते हैं तो हमारा शहर कैसा दिखेगा इस बारे में सोचें। कला और बॉलीवुड की तस्वीरों के माध्यम के अलावा इसे और किस तरह से किया जा सकता था।’

 

अभियान के आयोजकों के अनुसार दिल्ली में प्रतिदिन 8,500 टन ठोस कचरा, 5,000 टन इलेक्ट्रॉनिक कचरा और 50-60 करोड़ गैलन मैला और दस टन जैव चिकित्सा अपशिष्ट निकलता है। उनका कहना है कि इसमें से महज पाँच फीसद का ही पुनर्चक्रण किया जाता है जबकि करीब 50 फीसदी कचरे को खाद में बदला जा सकता है और इसके 30 प्रतिशत का पुनर्चक्रण किया जा सकता है।

 

अभियान में इस्तेमाल किए गए अन्य पोस्टरों में ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे’ में शाहरुख और काजोल को दिखाया गया है। तस्वीर पर अभिनेता के प्रसिद्ध संवाद को बदलकर लिखा गया है ‘बड़े-बड़े देशों में जगह-जगह कूड़ा पड़ा रहता है।’

 

‘द डर्टी पिक्चर’ अभियान को ‘रिसाइकलयोरवेस्ट डॉट इन’ पर भी शुरू किया गया है जिसमें सभी तरह के कचरों के समाधान के लिए सम्पर्क सूची दी गई है। कलाकार गुप्ता की कृति ‘स्टॉप गारबेज स्टॉप’ आज के समय के शहरी जीवन की स्थिति पर कटाक्ष करती है।

 

कचरे को फिल्मी कैनवास से जोड़ा

 

कचरे के पुनर्चक्रण के मुद्दे पर प्रकाश डालने के लिए कलाकार शैली गुप्ता, कर्मा रीसाइक्लिंग और डीआईएलवाई (दिल्ली आइ लव यू) के साथ मिलकर काम कर रही है। ‘द डर्टी पिक्चर’ नामक इस परियोजना के तहत मजाकिया लहजे में गुप्ता के बनाए गए प्रसिद्ध फिल्मों के दृश्यों को दक्षिण दिल्ली के कम-से-कम 54 कचरा निस्तारण केन्द्रों पर लगाया गया है। इन फिल्मी दृश्यों को कचरे से जोड़ते हुए कैनवास पर उतारा गया है।

 

साभार : जनसत्ता 10 सितम्बर 2015

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