स्वच्छता बनी प्रभाग की पहचान

Monday, August 17, 2015 - 10:05

सौम्या अनसुरकर

 

ठाणे महानगरपालिका के निर्माण के बाद से ही सबसे पिछड़ा प्रभाग क्रमांक-28 'अ' माना जाता था, लेकिन वर्तमान में इस प्रभाग की स्थिति सुधर गई है और विकास कार्य जारी हैं, इसका जिम्मा वर्ष 2012 में आरपीआई नगरसेवक राम भाऊ तायडे ने उठाया और उन्होंने अपने कार्यकाल के तीन साल में पानी, बिजली, सड़क, गटर जैसी मूलभूत सुविधाएँ देने की पूरी कोशिश की है। अम्बिका नगर 'अ' प्रभाग के अंतर्गत अम्बिका नगर-2, शिवराय गली, राजीव गाँधी नगर, नेहरू नगर, कोंडा आदि इलाके शामिल हैं। प्रभाग अम्बिका नगर ‘अ’ की जनसंख्या 10 हजार के आसपास है, जिसमें 80 प्रतिशत महिलाएँ कचरा बीनकर अपने परिवार का पेट पालती हैं। इन सभी को मूलभूत सुविधाएँ मुहैया कराने में अब तक सफल रहे हैं। आइए, जाने नगरसेवक द्वारा उनके प्रभाग के लिए किये गये कार्यों के बारे में।

 

आप कब से महानगरपालिका में नगरसेवक के तौर पर कार्यरत हैं और किस प्रभाग से चुने गए?

 

वर्ष 2012 में पहली बार नगरसेवक का चुनाव लड़कर सबसे ज्यादा मतों से मैं प्रभाग क्रमांक-28 (अ) से चुनकर आया था। यह मेरा पहला टर्म है जब मुझे जनता की सेवा करने का अवसर मिला। मेरे आने से पहले इस प्रभाग की स्थिति काफी दयनीय थी, लेकिन अपनी तरफ से मैंने तीन साल के अन्दर इस प्रभाग की स्थिति सुधारने की पूरी कोशिश की है।

 

आपके प्रभाग में क्या कार्य हुए हैं और इसमें आपका किस तरह से योगदान है?

 

मैं जब नगरसेवक चुनकर आया था तब इस प्रभाग के कई इलाकों में नल नहीं थे। यहाँ के लोग दूसरी जगह से पानी खरीदकर पीते थे। पिछले तीन साल में 90 प्रतिशत पानी की समस्या हल हो गई है। इसके साथ ही परिसर में अस्वच्छता थी, लेकिन प्रभाग को स्वच्छ बनाने के लिए मैंने स्वयं 5 महिलाओं को नियुक्त किया, जो सुबह से ही इलाकों की साफ-सफाई कर प्रभाग को स्वच्छ रखती हैं। वैसे तो पालिका की कचरा गाड़ी आती ही है, लेकिन यह महिलाएँ दिन में तीन बार प्रभाग के अंतर्गत आने वाले इलाकों में घूमकर कचरा उठाकर प्रभाग साफ करने का काम करती हैं। इसके बाद शौचालय की विकट अवस्था थी, लेकिन अब कई जगहों पर साफ-सुथरे शौचालय मिलेंगे। मेरी पहली प्राथमिकता प्रभाग को स्वच्छ और व्यवस्थित रखने को लेकर है, जिसे मैंने पूरा किया है। इसी के साथ अम्बेडकर सामाज के लोगों को एकजुट करने के उद्देश्य से अम्बिका नगर में स्थित पुराने बौद्ध विहार का नवीनीकरण किया जा रहा है। इन इलाकों में स्थित कई सड़कों को कंक्रीट का बनाया गया है। ठाणे स्टेशन में स्थित सेटिस पुल के नीचे बाबा साहेब अम्बेडकर का आधा पुतला था, जिसे वहाँ से हटाकर महापालिका ने ठाणे स्टेशन के सामने 12 फुट का बनाकर भव्यता दी है। हर वर्ष मेरी तरफ से 100 गरीब बच्चों में शालेय गणवेश का वितरण किया जाता है। बारिश के समय गटर नाले आदि की साफ-सफाई, फुटपाथ की मरम्मत का विशेष ध्यान रखा जाता है।

 

आपके प्रभाग में बहुत से कार्य अधूरे हैं?

 

मेरे प्रभाग में सभी जाती धर्म के लोग हैं, लेकिन सबसे बड़ा वर्ग कचरा बीनने वालों का है। इनमें 80 प्रतिशत महिलाएँ हैं, जो तड़के 4 बजे से पालिका परिसर को स्वच्छ रखने के लिए अपने घर से निकलती हैं। उन महिलाओं की सुरक्षा राम भरोसे रहती है। कुछ महिलाएँ जब कचरा, प्लास्टिक की वस्तुएँ उठाती हैं तो आवारा कुत्ते भी इन्हें अपना शिकार बनाते हैं। इसलिए इन महिलाओं और पुरुषों के साथ ही ठाणे शहर के सभी कचरा बीनने वाले वर्ग को महापालिका की तरफ से मुफ्त उपचार और दवाइयाँ मिलें, इस मुद्दे पर कई बार पालिका और स्थायी समिति में मैंने आवाज उठाई है। जिसे जल्द-से-जल्द पूरा करने की कोशिश में हूँ। इसी के साथ इन इलाकों में एमएसईबी की बिजली की तारें ऊपर से जा रही हैं, जिन्हें भूमिगत करने की पहल शुरू की है, जिसके लिए सम्बन्धित अधिकारियों से चर्चा की जा रही है।

 

आपके प्रभाग में काफी योजनाएँ प्रलम्बित हैं, क्या कारण है?

 

मेरे प्रभाग का आधे से अधिक हिस्सा एमआयडीसी के अंतर्गत आता है। जिस वजह से यहाँ अभी तक नवयुवकों के लिए व्यायाम शाला, गार्डन, मैदान आदि का निर्माण नहीं हो पाया है, लेकिन जल्द ही पालिका मन्त्री एकनाथ शिंदे और एमआयडीसी के अधिकारियों से चर्चा करके उनसे इस इलाके में भूखण्ड की माँग करने वाला हूँ जहाँ पर बच्चों के लिए खेल का मैदान, गार्डन का निर्माण करा सकूँ।

 

अन्य प्रभाग में एसआरए योजना, बीएसयूपी योजना, राजीव गाँधी आवास योजना आदि के अंतर्गत लोग इमारतों में रहने गये है, लेकिन मेरे प्रभाग में एमआयडीसी के अंतर्गत भूखण्ड होने की वजह से प्रभाग की जनता और वागले एस्टेट में सरकारी योजनाओ के अंतर्गत पुनर्वसन नहीं कर पा रहा हूँ। यदि एमआयडीसी कुछ जमीन देती है तो मैं गरीब जनता के लिए शादी का एक हॉल बनाना चाहता हूँ जिससे वे अपने बच्चों की शादी अच्छे तरीके से कर सकें।

 

पहले आपका प्रभाग गुंडागर्दी, विवादों के नाम से फेमस था, इस पर क्या कहेंगे?

 

मेरे नगरसेवक बनने के पहले वागले पुलिस स्टेशन में सबसे अधिक शिकायतें मेरे प्रभाग की रहती थीं, लेकिन मेरे आने के बाद मैं विवादों, झगड़ों को पुलिस स्टेशन तक पहुँचने ही नहीं देता। अपने स्तर पर आपसी समझौते से ही उन्हें हल करने की कोशिश करता हूँ। जिस वजह से अब पुलिस स्टेशन में केस कम हो गये हैं।

 

नागरिकों का कहना है

 

यहाँ के नागरिकों से बात करने पर उन्होंने बताया कि पहले पीने के पानी के लिए दर-दर भटकना पड़ता था, लेकिन अब घरों, बस्तियों में नल लग जाने की वजह से लोगों को पानी आसानी से उपलब्ध हो जाता है। इस परिसर के वसंत मोरे का कहना है कि इस इलाके में महानगरपालिका की शाला न होने से हमे निजी संस्थाओं की शालाओं में बच्चों को भेजना पड़ता है। नगरसेवक तायडे कोशिश कर रहे हैं कि सर्व सुविधा युक्त पालिका की स्कूल इस प्रभाग में बन सके।

 

गणेश शरणागरत ने कहा कि हम सभी चाहते हैं कि युवाओं के लिए एक मिनी जिम या व्यायामशाला का निर्माण हो सके, इसी के साथ बच्चों को खेलने के लिए मैदान, गार्डन मिले। निशा मगटे और विमल शरणागत ने बताया कि पहले इस प्रभाग में काफी झगड़े होते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। इतना ही नहीं सामाजिक स्तर पर उन्होंने इस प्रभाग के 50 से अधिक लोगों को व्यसन मुक्त किया और कई परिवारों को उजड़ने से बचाया है। हम सभी आगे भी उम्मीद करते हैं कि प्रभाग में इसी तरह की शान्ति बनी रहे।

 

साभार : एब्सल्यूट इंडिया 17 अगस्त 2015

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