स्वास्थ्य, पोषण एवं स्वच्छता बिना उत्थान सम्भव नहीं: मुख्यमन्त्री

Tuesday, July 21, 2015 - 14:07

कुमार कृष्णन

 

पटना। मुख्यमन्त्री श्री नीतीश कुमार ने श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल पटना में समाज कल्याण विभाग द्वारा आयोजित ग्राम वार्ता के नाम से आयोजित राज्यस्तरीय कार्यशाला का दीप प्रज्जवलित कर उद्घाटन करते हुये कहा कि महिलाओं के उत्थान के बिना समाज का उत्थान सम्भव नहीं है। उन्होंने कहा कि नारी सशक्तिकरण की नीति बनायी है। उसके हिसाब से कार्यक्रम बनाया है, समुदाय की शिक्षा पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि संगठन बने। हमारा लक्ष्य है कि दस लाख स्वयं सहायता समूह का गठन हो। तीन से चार लाख के अन्दर स्वयं सहायता समूह का गठन हो चुका है। लड़कियों को स्कूल तक पहुँचने का अवसर मिले, इसके लिये प्रत्येक पंचायत में हाई स्कूल की स्थापना की जा रही है। महिलायें आगे बढ़े, उन्हें रोजगार मिले। महिलायें हुनरमन्द बनें, महिलाओं को जागरूकता एवं कौशल का प्रशिक्षण मिले।

 

मुख्यमन्त्री ने कहा कि 84 हजार स्वयं सहायता समूह ग्राम वार्ता से जुड़ी हुयी है। महिलाओं एवं बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य एवं पोषण हेतु सरकार के विभिन्न प्रयासों में ग्राम वार्ता कार्यक्रम महिलाओं द्वारा संचालित एक ऐसा प्रयास है जो समुदाय संचालित सहभागिता, सीख एवं क्रियान्वयन पद्धति पर आधारित है। ग्राम वार्ता के जरिये स्वयं सहायता समूह लोगों को जागरूक करेगी तो पूरा गाँव स्वच्छ हो जायेगा। बीमारी घट जायेगी। बिहार में अभियान चलाकर पोलियो का उन्मूलन हुआ। उन्होंने कहा कि डी.एफ.आई.डी. द्वारा ग्राम वार्ता की शुरूआत हुयी है। ग्राम वार्ता स्वास्थ्य, पोषण एवं स्वच्छता पर जोर दे रही है। इसके अलावा सरकार शिक्षा एवं खाद्य सुरक्षा तथा स्किल डेवलपमेंट पर जोर दे रही है। एक लाख से ज्यादा महिलाओं को हुनरमन्द बनाया गया है।

 

मुख्यमन्त्री ने कहा कि बिहार में 10 लाख स्वंय सहायता समूह का गठन किया जाना है। इसमें 1.5 करोड़ महिलायें जुड़ेगी, डेढ़ करोड़ महिलाओं के जुड़ने का मतलब है डेढ़ करोड़ परिवार जुड़ेगा। छह करोड़ लोग स्वयं सहायता समूह के गठन से लाभान्वित होंगे। आधी आबादी तक आसानी से पहुँचा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि जब 9वीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्राओं के लिए मुख्यमन्त्री साइकिल योजना की शुरूआत की गई। उस समय हाईस्कूल में पढ़ने वाली लड़कियों की संख्या 44 प्रतिशत थी, लड़कों की संख्या 56 प्रतिशत थी। मुझे कल यह जानकर अत्यंत खुशी हुई कि हाई स्कूल में पढ़ने वाली लड़कियों की संख्या लड़कों के बराबर हो गई है।

 

उन्होंने कहा कि हाई स्कूल में पढ़ने वाली लड़कियों की संख्या 8,15,837 है जबकि लड़कों की संख्या 8,28,347 है। तेरह हजार का अन्तर मात्र है। उन्होंने कहा कि नारी शिक्षा के क्षेत्र में इतनी बड़ी उपलब्धि मौन क्रान्ति एवं परिवर्तन का द्योतक है। उन्होंने कहा कि जब हमने पहली बार कार्यभार सम्भाला था, उस समय राज्य में 18 प्रतिशत टीकाकरण हुआ था, जो आज बढ़कर 78 प्रतिशत हो गया है, जो कि राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है। जल्द ही बिहार में टीकाकरण 90 प्रतिशत होगा और देश के सर्वश्रेष्ठ पाँच राज्यों में बिहार एक होगा। उन्होंने कहा कि अभियान चलाकर टीकाकरण योजना के क्रियान्वयन से बच्चों की मृत्यु दर में कमी आयी है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति की महता को पहचानते हुये हमने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया। एक साल बाद नगर निकाय चुनाव में भी महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव एवं नगर निकाय चुनाव में 50 प्रतिशत से अधिक महिलायें निर्वाचित होकर प्रभावशाली ढंग से अपनी भूमिका निभा रही हैं।

 

मुख्यमन्त्री ने कहा कि स्वास्थ्य, पोषण एवं स्वच्छता के प्रति जागरूकता पैदा करने की दिशा में ग्राम वार्ता को मैं सशक्त पहल के रूप में देखता हूँ। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह काम अनेक स्थलों पर देखने का मौका मिला है। समूह दीदीयों के साथ बातचीत करने का भी मौका मिला है। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह का गठन महिला विकास निगम के द्वारा या राज्य स्तर पर डी.आर.डी.ए. के माध्यम से गठित किया जा रहा था लेकिन जब वर्ल्ड बैंक की सहायता से जीविका नाम की जो पहल हुई और उसके द्वारा जो स्वयं सहायता समूह का गठन किया जा रहा है, वह काफी प्रभावी है। हम लोगों ने निर्णय लिया कि अब तक जितने अन्य प्रकार से स्वयं सहायता समूह का गठन हुआ है, ये सबकी जीविका के साथ मिलाया जायेगा और जीविका का जो कार्यक्रम है, जो ढाँचा है या जीविका के माध्यम से जिस प्रकार से समूहों का गठन एवं

संचालन हो रहा है, उसी प्रकार से अन्य पूर्व में गठित समूहों का भी संचालन हो रहा है।

 

मुख्यमन्त्री ने कहा कि आज से तीन-चार वर्ष पूर्व हम लोगों ने निर्णय लिया कि हम पूरे बिहार को आच्छादित करेंगे और पूरे बिहार में स्वयं सहायता समूह का गठन किया जायेगा। हमने दस लाख स्वयं सहायता समूह गठित करने का लक्ष्य निर्धारित किया। हमने देखा कि समूहों के गठन होने से उनके कार्यक्रमों के जरिये महिलाओं में न केवल बचत करने की इच्छा हुयी बल्कि आत्मविश्वास का भी भाव जागा। उन्हें आत्मनिर्भर एवं स्वावलम्बी होने की प्रेरणा मिली। हमने देखा कि जो महिलायें पढ़ना-लिखना नहीं जानती थी, वह भी सबके साथ बैठकर बैठकों को संचालित करने लगी और बैठक की प्रोसिडिंग लिखना शुरू किया। उन्होंने रजिस्टर का संधारण करना भी शुरू किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2006 में महिला विकास निगम के द्वारा गठित समूहों के बीच जाने का अवसर मुझको मिला और उनके काम से मैं प्रभावित हुआ। हमने जोर दिया कि विश्व बैंक की सहायता से जो जीविका प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है, उसमें तेजी आये। पहले छह-सात जिलों में इस काम को शुरू किया गया था। शुरू में 44 प्रखण्ड ही लिये गये थे। इसके प्रभाव को देखते हुये इसे पूरे राज्य में लागू किया गया।

 

मुख्यमन्त्री ने कहा कि स्वयं सहायता समूह की दीदियाँ आज एक सदस्य के यहाँ तो कल दूसरे सदस्य के यहाँ मिलने लगी और आपस में बातचीत करते हुये उनमें आत्मविश्वास पैदा हुआ। उन्होंने अनेक काम अपने हाथों में लिया। जन वितरण प्रणाली की दुकान उन्हें आवंटित की गयी। पूर्णिया जिले में हमने स्वयं सहायता समूह की दीदी द्वारा चलाये जा रहे जन वितरण प्रणाली की दुकान के बारे में जानकारी ली तो लोगों ने कहा कि बिल्कुल समय पर तौल के हिसाब से निर्धारित मूल्य पर राशन प्राप्त हो रहा है। जब हमने उनसे पूछा कि कितना मुनाफा हो रहा है तो उन्होंने कहा कि चार से पाँच हजार रूपये मासिक मुनाफा हो रहा है, जबकि जन-वितरण प्रणाली के दुकानदार का कहना है कि जन-वितरण प्रणाली से मुनाफा नहीं होता है। उन्होंने कहा कि अगर स्वयं सहायता समूह का गठन ठीक ढंग से समय पर हो जाये तो इसे बड़ा दूसरा कोई काम नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति को संगठित कर उन्हें जागृत कर उस शक्ति का उपयोग किया जाय तो परिणाम बहुत ही अच्छा होता है।

 

मुख्यमन्त्री ने कहा कि प्रारम्भ में पचास प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण के माध्यम से प्रचास प्रतिशत से अधिक महिलायें त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में निर्वाचित होकर आयी तो उनके साथ एम.पी. और एस.पी. भी आये। उस समय मुखिया पति एम.पी. एवं सरपंच पति एस.पी. जैसे शब्द का मजाक चल पड़ा। शनैः शनैः वर्ष बीतने के बाद ये चीजें गौण हो गयी, आज उन्हें जो जिम्मेदारी मिली है, उसका बखूबी निर्वहन कर रही है। उन्होंने कहा कि गाँवों में लोग प्राइमरी स्कूल तक लड़कियों को पढ़ने के लिये भेजते थे लेकिन मिडिल स्कूल में पढ़ने के लिये पोशाक नहीं रहने के कारण भेजना बन्द कर दिये थे।

 

हमने मुख्यमन्त्री बालिका पोशाक योजना शुरू की तो लड़कियों की संख्या में वृद्धि हुयी। हमने मुख्यमन्त्री बालिका साइकिल योजना शुरू की तो यह बात गाँव से निकलकर इंग्लैंड तक पहुँची। मुख्यमन्त्री ने कहा कि बिहार में प्रजनन दर 3.9 से घटकर 3.6 तक आया अंततोगत्वा इसे दो पर आना है। हम दो हमारे दो। उन्होंने कहा कि परिवार नियोजन के अनेक साधनों के अपनाने के बाद भी प्रजनन दर में कमी नहीं आयी। लिंगानुपात को संतुलित करना पड़ेगा।

 

आज बिहार में एक हजार पुरूष पर महिलाओं की संख्या 917 है, यह स्थिति ठीक नहीं है। महिलाओं के लिये शिक्षा जरूरी है। हमने देखा कि अगर लड़की मैट्रिक पास है तो उस जोड़ी का प्रजनन दर देश में 2 है, बिहार में भी 2 है। अगर लड़की 12वीं कक्षा तक पास है तो देश में प्रजनन दर 1.7 है, जबकि बिहार में प्रजनन दर 1.6 है। उन्होंने कहा कि हमने निर्णय लिया कि लड़कियों को शिक्षित करने के लिये प्रत्येक पंचायत में हाई स्कूल की स्थापना की जायेगी। लड़की अगर पढ़ लेती है तो पूरे परिवार को शिक्षित करती है। इससे बाल विवाह रूकता है तथा लिंगानुपात ठीक हो जाता है, भ्रूण हत्या नहीं होती है। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह के द्वारा भ्रूण हत्या एवं बाल विवाह को भी रोकने में मदद करती है।

 

उन्होंने कहा कि पहले लड़कियाँ शहर में भी साइकिल नहीं चलाती थी। अगर गाँव में कोई लड़की साइकिल चलाती थी तो लड़की के घरवालों पर आफत आ जाती थी और गाँव वालों द्वारा कहा जाता था कि लड़की को सम्भालों नहीं तो हाथ से निकल जायेगी। आज झुण्ड में लड़कियाँ गाॅवों में साइकिल चलाकर स्कूल जाती है। इसे ही परिवर्तन कहते हैं। अगर किसी को यह परिवर्तन नहीं दिखायी पड़ता है तो हम क्या कर सकते हैं। उन्हें औजार कार्यक्रम के तहत कीट उपलब्ध कराया गया। उन्होंने महिला विकास निगम के प्रबंध निदेशक सह जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी श्रीमती एन.विजय लक्ष्मी को निर्देश दिया कि स्वयं सहायता समूह के गठन के लक्ष्य को शीघ्र पूरा किया जाये।

मुख्यमन्त्री ने कहा कि हम लोगों ने मशाल जलाकर संकल्प लिया था कि पहले शौचालय तब देवालय।

 

बिहार पहला राज्य है, जहाँ बी.पी.एल के साथ ए.पी.एल को भी लोहिया स्वच्छता मिशन से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों को चाहिये कि स्वास्थ्य एवं पोषण के क्षेत्र में जो योजनायें हैं, उसको अपने साथ जोड़ें। उन्होंने कहा कि आज सबसे तेज इलेक्ट्राॅनिक मीडिया है लेकिन स्वयं सहायता समूह के माध्यम से सरकार

स्वच्छता को छह करोड़ लोगों तक पहुँचा सकती है। बिहार की आधी आबादी को कवर करने के बाद पूरी आबादी कवर हो जायेगी।

 

महिलाओं द्वारा शराब बन्दी की माँग किये जाने पर मुख्यमन्त्री ने कहा कि अगली बार जब हम सरकार में आयेंगे तो शराब पर प्रतिबंध लगायेंगे। उन्होंने कहा कि आप सभी लोगों का भविष्य उज्ज्वल हो। कार्यशाला में डी.एफ.आई.डी. के कंट्री हेड सुश्री एलेन रोटन ने मुख्यमन्त्री श्री नीतीश कुमार की जमकर सराहना करते हुये कहा कि मुख्यमन्त्री ने महिला सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। मुख्यमन्त्री बालिका साइकिल योजना एवं त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में महिलाओं के पचास प्रतिशत आरक्षण से महिलाओं में जागृति आयी है और महिलायें सशक्त हुयी है।

 

इस अवसर पर स्वास्थ्य मन्त्री श्री रामधनी सिंह, समाज कल्याण मन्त्री श्रीमती लेसी सिंह, ग्रामीण विकास मन्त्री श्री श्रवण कुमार ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त करते हुये महिलाओं की गुणवता के लिये ग्राम वार्ता को सफल बनाने का अनुरोध किया। बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति की मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी सह महिला विकास निगम की प्रबंध निदेशक श्रीमती एन.विजय लक्ष्मी ने स्वागत भाषण किया तथा प्रतीक चिह्न देकर मुख्यमन्त्री का स्वागत किया। धन्यवाद ज्ञापन निदेशक समेकित बाल विकास श्री बैद्यनाथ यादव ने किया। इस अवसर पर मुख्यमन्त्री के सचिव श्री अतीश चन्द्रा, संयुक्त सचिव लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग श्री उदय कुमार सिंह, निदेशक समाज कल्याण निदेशालय श्री इमामुद्दीन अहमद, टीम लीडर बीटास्ट श्री प्रभात कुमार एवं डी.एफ.आई.डी. के बिहार प्रभारी श्री पद्म कुमार सहित गणमान्य व्यक्ति एवं हजारों दीदियाँ उपस्थित थीं।

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