गाँवों में विकसित होगी कूड़ा निस्तारण प्रणाली

Thursday, July 9, 2015 - 10:57

लखनऊ (डीएनए)। स्वच्छ भारत मिशन के तहत अब गाँवों में भी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट व्यवस्था लागू करने की कार्ययोजना बनाई जा रही है। इसी के तहत पंचायती राज निदेशालय के सहयोग से एक राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन-गाइड लाइंस एवं आईईसी रणनीति पर आयोजित किया गया। उद्यमिता विकास संस्थान के माध्यम से तीन दिवसीय कार्यशाला का उद्देश्य प्रबंधन के लिए गाइड लाइंस तैयार करना है। कार्यशाला में संस्थान के निदेशक ए.एस राठौर, निदेशक पंचायती राज विभाग उदयवीर सिंह यादव एवं उप निदेशक पंचायती राज एस.एन सिंह ने अपने विचार व्यक्त किए।

 

मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए उदयवीर सिंह यादव ने कहा कि नदियों की सफाई पर हो रहा खर्च बर्बाद किया जा रहा है। बिना नालों को डायवर्ट किए नदियाँ साफ नहीं हो सकती हैं। ऐसे में सफाई के नाम पर फिजूलखर्ची हो रही है। उन्होंने कहा कि पंचायती राज के समस्त कार्यक्रम स्वच्छता से सम्बन्धित हैं। पंचायती राज निदेशालय की ओर से शौचालय बनाए गए हैं लेकिन उनमें से 70 फीसदी ही प्रयोग किए जा रहे हैं।

 

उदयवीर सिंह यादव ने कहा कि नदियों की सफाई पर हो रहा खर्च बर्बाद किया जा रहा है। बिना नालों को डायवर्ट किए नदियाँ साफ नहीं हो सकती हैं। ऐसे में सफाई के नाम पर फिजूलखर्ची हो रही है।

 

विभागीय अधिकारियों व संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि वे गाँव-गाँव जाकर लोगों को जागरुक करें। उप निदेशक पंचायती राज विभाग एस.एन सिंह ने कहा कि हम माँग और पूर्ति को समझते हुए कार्य करते हैं लेकिन यह कार्य ऐसा है कि जहाँ माँग है वहीं से सप्लाई आएगी यानि ग्रामों, ग्रामवासियों की माँग स्वच्छता की है, तो समाधान भी ग्रामों में ही है। जो प्रोडक्शन हो उसका निस्तारण कैसे हो?

 

गाइइ लाइंस में सोच का परिवर्तन हो इसके लिए तीन स्तर का ओरिएंटशन होना चाहिए एवं तीनों में सामंजस्य, डिमांड, सप्लाई, टेक्नालॉजी एवं स्वीकार्यता को बढ़ाना है। ग्राम पंचायत स्तर पर कम्पोस्ट खाद के गड्ढे, लिक्विड वेस्ट का कार्य, भौगोलिक परिस्थितियों के अभाव में योजना बनाई जा सकती है। संस्थान के निदेशक, ए.एस राठौर ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन में आईईसी की महत्वपूर्ण भूमिका है। कार्यशाला का उद्देश्य राज्य के लिए गाइडलाइंस विकसित करना है। अलग-अलग स्थानों पर तौर तरीके भी अलग-अलग हो सकते हैं। गाइडलाइंस को तैयार करने में सभी का अनुभव शामिल हो यह भी आवश्यक है। सभी को इसके भावनात्मक पक्ष से जुड़ने की भी आवश्यकता है।

 

इस कार्यशाला में विभिन्न जनपदों के 35 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यशाला में प्रमुख वक्ता के रूप में श्री वाई.डी माथुर कार्यपालक निदेशक सुलभ इंटरनेशनल, जितेन्द्र प्रताप सिंह निदेशालय पंचायती राज, सुश्री ममता चौहान कार्यक्रम संयोजिका, उद्यमिता विकास संस्थान ने ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन की गाइड लाइंस बनाने पर अपने मंतव्य व्यक्त किए।

 

साभार : डेली न्यूज ऐक्टिविस्ट 7 जुलाई 2015

TAGS