चार वर्षो में शौचालय एवं स्वच्छता कार्यक्रम होगा पूरा

Tuesday, July 7, 2015 - 14:29

कुमार कृष्णन

 

दुमका। झारखण्ड का नाम देश के ऐसे राज्यों में शुमार है, जहाँ शौचालय विहीन घरों की संख्या सर्वाधिक है। हाल में विकास के नाम पर पिछड़े संथाल परगना के दुमका में एक लड़की की आत्महत्या का कारण शौचालय बना और यह खबर सामने आयी तो जिला प्रशासन से लेकर राज्य का प्रशासन तन्त्र हरकत में आ गया। इसके नाम पर हो रहे घोटाले की परत-दर परत खुलने लगी हैं। काम करने वाली एजेंसी के किरदार पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं इस काम के नाम पर लूट की इबारत लिखी गयी। अब सवाल यह उठ रहा है कि कार्य करने वाली एजेंसी के कामों का भौतिक स्तर पर सत्यापन किया जाये। इसी परिप्रेक्ष्य में उपायुक्त श्री राहुल कुमार सिन्हा ने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा स्वच्छ भारत मिशन के तहत कराये जा रहे कार्यों की समीक्षा की।

 

उपायुक्त ने कहा कि सन 2019 तक पूरे जिले को इस मिशन (एस.बी.एम.) के तहत शौचालय एवं स्वच्छता कार्यक्रमों से आच्छादित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में यहाँ स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिनके यहाँ शौचालय नहीं है, उन लोगों को 12000 रु की राशि दी जा रही है। इसके अलावा पहले के बनाये गये शौचालय, जो उपयोग में नहीं आ सके हैं उनके पुर्नउद्धार के लिए कार्यक्रम 'स्लिप बैक' लाया जाएगा।

 

स्व. खुशबू की आत्महत्या के सम्बन्ध में पेयजल स्वच्छता विभाग ने अभिलेख एवं छायाचित्र के जरिए उपायुक्त को जानकारी दी कि सन 2008 में संजू देवी; खुशबू की माँ नव निर्मित शौचालय के बाहर खड़ी हैं। आज भी शौचालय का अवशेष श्रीमती संजू देवी के घर पर है। सन 2008 में श्रीमती संजू देवी; स्व. खुशबू की माँ के घर निर्मल ग्राम अभियान के तहत शौचालय बना था। लेकिन ये मामला अब 'स्लिप बैक' का है।

 

पेयजल स्वच्छता विभाग ने बताया कि जहाँ पहले शौचालय बनाया गया और उसके बाद शौचालय उपयोग में लाया जा सका अथवा वे शौचालय भी अनुपयुक्त या बर्बाद हो गये उन्हें 'स्लिप बैक' कहा जाता है।

 

उपायुक्त ने कहा कि स्व. खुशबू की आत्महत्या का कारण जो भी रहा हो किन्तु यह पीड़ादायक और दुखद है। हमें देश के ऐसे महत्वपूर्ण मानव संसाधन को खोने से रोकना होगा। इस हेतु समाज के सभी वर्ग के लोगों को सामने आकर सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

 

उप विकास आयुक्त ने जानकारी दी कि मनरेगा के तहत इस वित्तीय वर्ष में 10,325 शौचालय ग्राम सभा के अनुशंसा पर बनाये जा रहे हैं, जिसमें लाभुक को पैसा दिया जाता है ताकि वे मानक शौचालय बना सके। उन्होंने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत इस वित्तीय वर्ष में 10852 शौचालय निर्माण करने की योजना है। पेयजल स्वच्छता विभाग ने बताया कि जहाँ पहले शौचालय बनाया गया और उसके बाद शौचालय उपयोग में लाया जा सका अथवा वे शौचालय भी अनुपयुक्त या बर्बाद हो गये उन्हें 'स्लिप बैक' कहा जाता है। इस पर सरकार द्वारा निर्णय लिया जाना है और सरकार इसके पुनर्जीवन पर गम्भीरता से विचार कर रही है।

 

उपायुक्त ने पेयजल स्वच्छता विभाग को निर्देश दिया कि सर्वप्रथम पूरे जिले में शौचालय विहीन घर एवं 'स्लिप बैक' घरों की पहचान करे। उन्होंने कहा कि प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी जिनको दी गई है, विभाग उनके कार्यों का भी नियमित पर्यवेक्षण कराये। उन्होंने कहा कि मीडिया को सभी तथ्य की जानकारी दी जाये, जिससे वे सम्पूर्ण पक्षों के साथ वस्तु स्थिति को सही तरीके से जनता के सामने रख सके।

 

बैठक में पेयजल स्वच्छता विभाग के निदेशक श्री श्वेताभ कुमार, अधीक्षण अभियंता श्री तनवीर अख्तर एवं श्री मार्कण्डेय मिश्रा, कार्यपालक अभियंता श्री साधुशरण एवं श्री मंगल पूर्ति, जिला समन्वयक, श्री टी.के. डेविड तथा क्षेत्रीय उप निदेशक सह जिला जनसम्पर्क पदाधिकारी अजयनाथ झा दुमका उपस्थित थे।

 

गौरतलब है कि घर में शौचालय नहीं होने से क्षुब्ध नगर के शास्त्रीनगर मुहल्ले की युवती खुशबू ने घर में फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। खुशबू का कहना था कि पहले शौचालय बने उसके बाद उसकी शादी हो। दरअसल दुमका में शौचालय निर्मल ग्राम योजना से लेकर स्वच्छ भारत अभियान के तहत कराये गए घपले की भेंट चढ़ गए। पेयजल स्वच्छता विभाग का यह दावा है कि लक्ष्य के विरूद्ध 80 फीसदी शौचालयों के निर्माण कराए गए। 206 पंचायतों में से 100 पंचायतों को खुले में शौच से मुक्त कराया गया। 60 से 70 फीसदी गाँव निर्मल गाँव घोषित किए गए। पर ये जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं।

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