खुले शौच से मुक्ति दिलाने की दिशा में एक कदम

Thursday, July 2, 2015 - 16:33

कुमार कृष्णन

 

स्वच्छ भारत मिशन के तहत पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा राज्य के साहेबगंज जिले को मॉडर्न जिला बनाने की कवायद तेज कर दी गई है। प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के नमामि गंगे परियोजना के तहत वित्तीय वर्ष 2015-16 में साहेबगंज की 33 पंचायतों को खुले में शौच से मुक्त कराया जाएगा। इसके अलावा राज्य की 600 पंचायतों को इस वित्तीय वर्ष में खुले में शौच से मुक्त कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

 

राज्य के मुख्य सचिव राजीव गौबा ने साहेबगंज के उपायुक्त सह जिला जल एवं स्वच्छता समिति के अध्यक्ष को पत्र लिखकर कहा है कि नमामि गंगे परियोजना के तहत साहेबगंज जिले के गंगा नदी के किनारे अवस्थित 33 ग्राम पंचायतों के 78 ग्रामों में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत मार्च 2016 तक पारिवारिक व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण लक्षित है। वर्षा के मौसम को ध्यान में रखते हुए समयबद्ध कार्य करने हेतु आवश्यक है कि निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री एवं मानव शक्ति का प्रबन्धन परियोजना के लक्ष्यों के अनुरूप अग्रिम कर लिया जाए। क्योंकि वर्षा के समय प्रस्तावित पंचायत बाढ़ प्रभावित होती है। ऐसे में सामग्रियों का परिवहन प्रभावित होना स्वाभाविक है तथा ससमय योजना को पूर्ण करना मुश्किल होगा। एक शौचालय की निर्माण लागत 12 हजार रुपए है।

 

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के प्रधानसचिव अमरेन्द्र प्रताप सिंह ने राज्य के सभी उपायुक्तों सह जिला जल स्वच्छता समिति के अध्यक्षों को पत्र लिखकर कहा है कि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2015-16 में कुल तीन लाख 29 हजार 398 घरेलू व्यक्तिगत शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य की उपलब्धि हेतु राज्यस्तर पर कार्य करते हुए लगभग 600 ग्राम पंचायतों को खुले में शौच से मुक्त कराने का लक्ष्य रखा गया है। प्राथमिकता के आधार पर राज्य के प्रत्येक प्रखण्ड में दो पंचायतों को खुले में शौच से मुक्त कराने का चयन किया जाना है।

 

श्री गौबा ने कहा है कि राजमिस्त्रियों की प्रत्येक टीम (एक राजमिस्त्री एवं तीन सहयोगी मजदूर) लगभग एक महीने में 8 से 10 शौचालयों का निर्माण कर सकती है। जिले के उपायुक्त को निर्देश दिया गया है कि इसी के अनुरूप मानवशक्ति का प्रबन्ध करें। क्योंकि वर्षा के मौसम में ईंटों का निर्माण भी प्रभावित होगा। एक शौचालय निर्माण पर लगभग 1000 ईंटों की जरूरत होती है। अत: सामग्री एवं मानवशक्ति का अग्रिम प्रबन्धन करना आवश्यक है। ताकि शौचालय निर्माण कार्य प्रभावित नहीं हो। पत्र में कहा गया है कि परियोजना में गुणवत्तापूर्ण स्वच्छ कर स्थायी शौचालयों का निर्माण निश्चित समयावधि में पूर्ण करना राज्य सरकार का भी लक्ष्य है। उपायुक्त को व्यक्तिगत रूचि लेकर निर्माण कार्य सम्पन्न कराने का निर्देश दिया गया है। नमामि गंगे परियोजना के तहत कराये जा रहे कार्यों की सतत निगरानी केन्द्र सरकार एवं प्रधानमन्त्री कार्यालय द्वारा समय-समय पर की जा रही है।

 

3 लाख 29 हजार शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य

 

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के प्रधानसचिव अमरेन्द्र प्रताप सिंह ने राज्य के सभी उपायुक्तों सह जिला जल स्वच्छता समिति के अध्यक्षों को पत्र लिखकर कहा है कि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2015-16 में कुल तीन लाख 29 हजार 398 घरेलू व्यक्तिगत शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य की उपलब्धि हेतु राज्यस्तर पर कार्य करते हुए लगभग 600 ग्राम पंचायतों को खुले में शौच से मुक्त कराने का लक्ष्य रखा गया है। प्राथमिकता के आधार पर राज्य के प्रत्येक प्रखण्ड में दो पंचायतों को खुले में शौच से मुक्त कराने का चयन किया जाना है। पहला पंचायत प्रखण्ड मुख्यालय की पंचायत होगी तथा दूसरी पंचायत ऐसी होगा जिसमें पेयजलापूर्ति योजना हो। जिन ग्राम पंचायतों का खुले में शौच से मुक्त कराने हेतु चयन किया जाना है उन सभी ग्राम पंचायतों में ठोस, तरल एवं कचरा प्रबन्धन योजना भी सुनिश्चित की जाएगी।

 

श्री सिंह ने उपायुक्तों से कहा है कि ऐसी पंचायत जो खुले में शौच से मुक्त हो गयी है या होने को तैयार है उस पंचायत में प्राथमिकता के आधार पर जलापूर्ति योजना का भी सूत्रण किया जाना चाहिए। साथ ही ऐसी पंचायत या ग्राम जहाँ 50 प्रतिशत शौचालय निर्माण वित्तीय वर्ष 2014-15 तक पूर्ण है उसे भी प्राथमिकता में शामिल कर खुले में शौच से मुक्त किया जाए। श्री सिंह ने साहेबगंज को मॉडल जिला बनाने के लिए वहाँ के उपायुक्त को विशेष निर्देश दिए हैं। यूनिसेफ द्वारा रामगढ़ जिला के दुलमी एवं सिमडेगा जिले के केरसई प्रखण्ड का खुले में शौच से मुक्त कराने के लिए चयन किया है।

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