स्मार्ट सिटी से पहले

Thursday, July 2, 2015 - 11:28

पी.के खुराना

 

प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने देश को स्मार्ट सिटी का विचार देकर ई-गवर्नेंस की अवधारणा को एक नए स्तर पर ले जाने का प्रयास किया है। पूर्णत: स्मार्ट सिटी हो जाने पर स्मार्ट सिटी के निवासियों की अधिकांश समस्याएँ स्वत: ही हल हो जाएँगी। स्मार्ट सिटी बनने की आवश्यक शर्तों में ई-गवर्नेंस तो है ही, लेकिन यह एक धुरी मात्र है, जिस पर शेष सेवाएँ आधारित हैं। दरअसल, पश्चिमी देशों में हाई-स्पीड इंटरनेट ब्राडबैंड सुविधा के कारण स्मार्ट सिटी के बारे में यह धारणा बनने लगी है कि जहाँ सारी सरकारी सेवाएँ इंटरनेट आधारित हैं, वह एक स्मार्ट सिटी है, परन्तु एक स्मार्ट सिटी बनने से पहले किसी भी शहर में बहुत से अन्य आवश्यक तत्वों का होना जरूरी है और इनमें मूलभूत तत्व हैं- पूरे सरकारी अमले का नजरिया, नागरिकों का नजरिया, समाज का नजरिया। इसके लिए जन साधारण का सतत शिक्षण और सरकारी कर्मचारियों व अधिकारियों का निरन्तर प्रशिक्षण एक अनिवार्य आवश्यकता है।

 

दरअसल, पश्चिमी देशों में हाई-स्पीड इंटरनेट ब्राडबैंड सुविधा के कारण स्मार्ट सिटी के बारे में यह धारणा बनने लगी है कि जहाँ सारी सरकारी सेवाएँ इंटरनेट आधारित हैं, वह एक स्मार्ट सिटी है, परन्तु एक स्मार्ट सिटी बनने से पहले किसी भी शहर में बहुत से अन्य आवश्यक तत्वों का होना जरूरी है और इनमें मूलभूत तत्व हैं- पूरे सरकारी अमले का नजरिया, नागरिकों का नजरिया, समाज का नजरिया।

 

स्मार्ट सिटी के महाअभियान में जनसाधारण को शामिल किए बिना स्मार्ट सिटी का सपना पूरा नहीं हो सकता। स्मार्ट सिटी वस्तुत: एक ऐसा शहर होता है, जो सतत आर्थिक विकास व उच्च जीवन स्तर सुनिश्चित करता है तथा अर्थव्यवस्था, परिवहन, पर्यावरण, जीवन स्तर और सरकारी सेवाओं की सर्वोच्च श्रेष्ठता पर फोकस करता है। इसके लिए मानव संसाधन, सामाजिक संसाधन और क्वालिटी इंफ्रास्ट्रक्चर का होना आवश्यक शर्त है। एनर्जी मैनेजमेंट, वेस्ट मैनेजमेंट, ग्रीन बिल्डिंग, सोलर एनर्जी, अर्बन ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम, वाटर हार्वेस्टिंग, ट्रैफिक मैनेजमेंट, स्मार्ट पार्किंग, स्मार्ट हेल्थ और स्मार्ट फोन सर्विसिज डिलीवरी किसी भी स्मार्ट सिटी के आवश्यक तत्व हैं। प्रदूषण रहित पर्यावरण, पार्किंग, सुचारू परिवहन व्यवस्था, जनसाधारण के उपयोग व लाभ के लिए तकनीक का प्रयोग तथा शहर के हर भाग में स्ट्रीट लाइटिंग की पर्याप्त व्यवस्था अपराधमुक्त शहर और उच्च जीवन स्तर के द्योतक हैं।

 

इसी वर्ष जारी फोर्ब्स की सूची में बार्सिलोना, न्यूयार्क, लंदन और सिंगापुर को स्मार्ट सिटी माना गया है। देश के 100 शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने की योजना है। पहले चरण में 20 ऐसे शहरों को चुना जाएगा, जो उपरोक्त शर्तों को पूरा करने के लिए सबसे पहले तैयार हो सकते हैं। इन 20 शहरों को इसी वित्त वर्ष से फंडिंग शुरू हो जाएगी, इन शहरों को अगले पाँच सालों में 100 करोड़ रुपए का फण्ड दिया जाएगा। जो शहर पहले चरण में नहीं चुने जा सकेंगे, उन्हें सरकार अपनी कमियाँ पूरी करने की ताकीद करेगी। केन्द्रीय शहरी विकास मन्त्रालय इस पूरे काम की देखरेख करेगा।

 

मानव संसाधन, सामाजिक संसाधन और क्वालिटी इंफ्रास्ट्रक्चर का होना आवश्यक शर्त है। एनर्जी मैनेजमेंट, वेस्ट मैनेजमेंट, ग्रीन बिल्डिंग, सोलर एनर्जी, अर्बन ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम, वाटर हार्वेस्टिंग, ट्रैफिक मैनेजमेंट, स्मार्ट पार्किंग, स्मार्ट हेल्थ और स्मार्ट फोन सर्विसिज डिलीवरी किसी भी स्मार्ट सिटी के आवश्यक तत्व हैं।

 

चण्डीगढ़ भी ऐसे 100 शहरों में शामिल है, जिसे स्मार्ट सिटी बनाने की योजना है। प्रशासन ने इसके लिए पूरे चण्डीगढ़ और इसके सभी गाँवों को आप्टिकल फाइबर केबल यानी ओएफसी से जोड़ दिया है। इस प्रकार शहर का कोना-कोना ओएफसी नेटवर्क के एक किलोमीटर के दायरे में आ गया है। ओएफसी की बदौलत ही गाँवों में ब्राडबैंड सेवाएँ मिलेंगी। यह ब्राडबैंड सेवा 100 एमबीपीएस स्पीड की होगी। बीते कल से ही चण्डीगढ़ डिजिटल इण्डिया के सपने में जुड़ गया है। अगले एक सप्ताह में यहाँ स्टैम्प पेपर के लिए ई-स्टैम्प पेपर सेवा, कॉलेज में दाखिले के लिए ई-एजुकेशन सेवा, एस्टेट ऑफिस में अपनी फाइल की ट्रैकिंग के लिए ई-कियोस्क सेवा, आरसी और ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आरएलए मोबाइल ऐप, सम्पर्क सेंटरों पर मिलने वाली सेवाओं की जानकारी के लिए एम-ऐप आदि लान्च हो जाएँगे तथा वेब पोर्टल के माध्यम से नागरिक अपनी शिकायतें दूर करवा सकेंगे।

 

यही नहीं, चण्डीगढ़ देश का ऐसा पहला शहर बन गया है, जो आप्टिकल फाइबर के जरिए दिल्ली से जुड़ गया है। शीघ्र ही स्पष्ट हो जाएगा कि चण्डीगढ़ पहले चरण के बीस शहरों में शामिल हो पाता है या नहीं। उल्लेखनीय है कि बीते कल प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने चण्डीगढ़ के दो सरपंचों से बात की। हालांकि स्मार्ट सिटी बनाने की कवायद के कारण ही चण्डीगढ़ में नागरिकों की बहुत सी शिकायतें दूर हो जाएँगी, लेकिन लगता है कि प्रशासन और निर्वाचित काउंसलरों की निगाह में छोटी-छोटी शिकायतें नहीं आ रही हैं, जिनसे आम आदमी का जीवन रोज-रोज प्रभावित होता है। इसके लिए दो सामान्य उदाहरण ही काफी हैं। यहाँ के सांसद और पार्षद सड़कों और पार्कों के रख-रखाव और विकास पर बहुत ध्यान देते हैं। कई बार तो ठीक-ठाक सड़क की भी रीकार्पेटिंग हो जाती है। लेकिन उन्हीं पार्कों के साथ लगी मार्केट की पार्किंग में पानी में खड़े वाहनों की तरफ किसी का ध्यान नहीं जाता। वाहनों के नियमित आवागमन के कारण पार्किंग का लेवल खराब हो जाता है और पानी में खड़ा रहने से सड़ने लगता है व बदबू और मच्छरों का घर बन जाता है लेकिन पार्किंग की मरम्मत सालों-साल नहीं होती।

 

साधारण घरों की बहुत सी महिलाएँ जो बूथ से व्यवसाय करती हैं, आसपास कहीं शौचालय न होने के कारण वे लघुशंका अथवा शौच की हाजत होने पर भी सारा दिन टॉयलेट नहीं जा सकतीं, जबकि उनके आसपास के पुरुष साथी खुले में ही निवृत्त हो लेते हैं, यहाँ तक कि कई बार तो महिलाओं की नजरों के सामने ही। इससे वे कई अनावश्यक बीमारियों की शिकार हो जाती हैं और उनकी बीमारी का असर उनके पूरे परिवार पर पड़ता है।

 

चण्डीगढ़ के बाजारों में शोरूमों में पानी और सीवरेज का प्रावधान है, लेकिन बूथों में यह सुविधा नहीं है। साधारण घरों की बहुत सी महिलाएँ जो बूथ से व्यवसाय करती हैं, आसपास कहीं शौचालय न होने के कारण वे लघुशंका अथवा शौच की हाजत होने पर भी सारा दिन टॉयलेट नहीं जा सकतीं, जबकि उनके आसपास के पुरुष साथी खुले में ही निवृत्त हो लेते हैं, यहाँ तक कि कई बार तो महिलाओं की नजरों के सामने ही। इससे वे कई अनावश्यक बीमारियों की शिकार हो जाती हैं और उनकी बीमारी का असर उनके पूरे परिवार पर पड़ता है। स्मार्ट सिटी एक अच्छा विचार है और इसका भरपूर स्वागत होना चाहिए लेकिन बड़े कामों के कारण छोटी आवश्यकताएँ नजरों से ओझल नहीं होनी चाहिए। ये दो छोटे उदाहरण ही इस बात का प्रमाण हैं कि स्मार्ट सिटी बनने के लिए सरकार, सरकारी कर्मचारी और समाज, सभी का नजरिया बदलने की आवश्यकता है।

 

मुझे कांग्रेसी नेता मणिशंकर अय्यर का एक संस्मरण याद आता है कि वे अपने लोकसभा क्षेत्र में लाइब्रेरी खुलवाना चाहते थे तो सम्बन्धित ग्रामीणों ने उनसे लाइब्रेरी की जगह श्मशान तक जाने का रास्ता पक्का करवाने की गुहार लगाई थी, क्योंकि बारिश के मौसम में जनाजा ले जाने वाले लोग अक्सर मृत देह सहित फिसल कर गिर जाते थे जो सबको बहुत अखरता था। स्मार्ट सिटी बनाने से पहले, स्मार्ट सिटी की आवश्यकताओं की सूची बनाने के लिए नेताओं की ही नहीं, जनता की भी भागीदारी आवश्यक है, ताकि जनता की रोजमर्रा की छोटी-बड़ी समस्याएँ उपेक्षित न रह जाएँ और स्मार्ट सिटी सचमुच पूर्णत: स्मार्ट सिटी बन सके।

 

लेखक वरिष्ठ जनसम्पर्क सलाहकार हैं।

 

लेखक ईमेल: pkkhurana@gmail.com

 

साभार : डेली न्यूज ऐक्टिविस्ट 2 जुलाई 2015

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