भलस्वा लैंडफिल साइट की जहरीली हवा

Friday, May 29, 2015 - 12:00

चन्द्रशेखर वर्मा

 

वेस्ट दिल्ली, 28 मई : उत्तरी दिल्ली नगर निगम भलस्वा लैंडफिल साइट में कूड़ा जलाकर एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) द्वारा पारित किए गए आदेशों की धज्जियाँ उड़ा रहा है, जबकि एनजीटी के आदेश में साफ तौर पर कहा गया था कि दिल्ली व एनसीआर में किसी भी प्रकार का कूड़ा नहीं जलाया जाएगा।

 

यहाँ पर कूड़ा जलाए जाने से साँस लेने में दिक्कत होती है। बच्चों को खाँसी आदि की समस्या हो गई है। शुद्ध हवा की बात दूर, धुआँ रहित हवा भी मिल जाए, वह भी काफी है- सुमित मिश्रा, स्वरूप नगर।

 

इतना ही नहीं निगम के कर्मचारियों की इस लापरवाही के चलते स्थानीय लोगों का साँस लेना मुश्किल हो गया है। ऐेसे में अब लोगों की साँसों में जहरीली हवा जाने के कारण यहाँ बीमारियाँ फैलने लगी हैं।

 

गौरतलब है कि एनजीटी ने दिल्ली-एनसीआर में बढ़ रहे वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए गत माह 29 अप्रैल को आदेश पारित किया था। इस आदेश में साफ तौर पर कहा गया था कि दिल्ली-एनसीआर में किसी भी प्रकार का कूड़ा नहीं जलाया जाएगा। अगर आदेशों की अवहेलना या कूड़ा जलाते हुए कोई पकड़ा गया तो उस पर पाँच हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। एनजीटी ने पारित किए गए आदेश के पालन की जिम्मेदारी उपायुक्त, उद्यान निदेशक, सह-आयुक्त व सम्बन्धित क्षेत्र के एसएचओ को सौंप दी थी। अगर एनजीटी के इन आदेशों की अवहेलना कोई व्यक्ति या निजी संस्था करती है, तो उस पर पुलिस और प्रशासन जुर्माना लगाने आदि की कार्रवाई कर सकते हैं, मगर ऐसे में क्या किया जाए जब खुद सरकारी विभाग नियमों की अनदेखी कर रहा है।

 

कूड़ा जलाए जाने पर पूरी तरह से रोक लगनी चाहिए। इस साइट से उठने वाले धुएँ के गुबार से गाँव के लोग बीमार पड़ रहे हैं- बसंत, भलस्वा गाँव निवासी।

 

एक अध्ययन के मुताबिक, देश की राजधानी में हर रोज 9 हजार टन कूड़ा उत्पन्न होता है। जिसमें से 3 हजार टन कूड़ा केवल भलस्वा लैंडफिल साइट में उत्तरी दिल्ली नगर निगम द्वारा प्रतिदिन डाला जाता है। उत्तरी दिल्ली नगर निगम इस कूड़े के निस्तारण के लिए सबसे सरल उपाय को अपना रही है, यानी उसे जलाया जा रहा है। इस लैंडफिल साइट में जलने वाला कूड़ा कई घण्टों या यूँ कहें दिनभर जलता रहता है।

 

हमारा अस्पताल भलस्वा लैंडफिल साइट के पास ही पड़ता है। यहाँ आसपास के रहने वाले लोगों में साँस की तकलीफ अन्य क्षेत्रों के मुकाबले अधिक हैं। कूड़े के जलाने से उठने वाले धुएँ से साँसों की समस्या सबसे अधिक होती है। इससे फेफड़ों की समस्या, उल्टी और हार्ट फेलियर होने जैसी तकलीफों से लोगों को जूझना पड़ सकता है। दमे के मरीजों को ऐसे में सबसे अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है- डॉ. अविनाश कुमार, एचओडी, मेडिसिन डिपार्टमेंट, बाबू जगजीवन राम अस्पताल।

 

साभार : नवोदय टाइम्स 29 मई 2015

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