दम तोड़ रहा है स्वच्छता अभियान

Tuesday, May 26, 2015 - 16:32

पूर्वी दिल्ली, 19 मई (ब्यूरो):  प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा चलाए गए स्वच्छ भारत अभियान के दौरान नेता, अभिनेता, सरकारी बाबू व अफसर शाहों के साथ ही कई पुलिस अधिकारियों ने सफाई अभियान के नाम पर झाड़ू पकड़ कर जम कर फोटो खिंचवाई व वाह-वाही लूटी लेकिन प्रधानमन्त्री द्वारा चलाया जा रहा सफाई अभियान सरकारी अफसरों के कारण ही ध्वस्त होता नजर आने लगा है। स्वच्छता अभियान को पलीता लगानें में पुलिस थाने भी पीछे नहीं हैं। कभी सफाई सप्ताह चलाने वाले थाना फर्श बाजार परिसर मे कूड़े के अम्बार नजर आने लगे हैं।

 

पूर्वी जिला के थाना फर्श बाजार परिसर में पीछे की ओर बनी पार्किंग में पड़े कूड़े के अम्बार देख कर कौन कहेगा कि यह वही थाना है जहाँ स्वच्छता कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। कूड़े के ढेर से पार्किंग स्थल के हालात नर्क के समान प्रतीत हो रहे हैं। दरअसल थाने की पार्किंग में लगे जूठी प्लेटों के ये अम्बार पुलिस कर्मियों के द्वारा खाना खाने के बाद फेंकी गई हैं। इन जूठी प्लेटों का ढेर सफाई अभियान की खिल्ली उड़ाता हुआ साफ तौर पर देखा जा सकता है, इसी को देख कर इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि दिल्ली पुलिस प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के सफाई अभियान को लेकर कितनी गम्भीर है व किस प्रकार सफाई अभियान पर पलीता लगा रही है।

 

स्वच्छता अभियान में जुटेंगे देशभर के डॉक्टर

 

मोदी सरकार की महत्वकांक्षी योजना स्वच्छ भारत अभियान में डॉक्टर भी जुड़ेंगे। इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) एवं दवा निर्माता कम्पनी एलकेम लैबोरेटरीज की ओर से क्लीन इण्डिया मूवमेंट की शुरुआत की जा रही है, जिसमें देश भर के तकरीबन 20,000 डॉक्टर शामिल होंगे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बढ़ रही बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक करना है। यह आयोजन 135 शहरों में किया जाएगा।

 

इस मुहिम की शुरुआत आगामी 23 मई को सुबह 9 बजे से दिल्ली के भगवान महावीर अस्पताल से होगी। मीडिया को सम्बोधित करते हुए आईएमए के उपाध्यक्ष डॉ. के.के अग्रवाल ने बताया कि बीमारियों की रोकथाम के लिए जागरुकता सबसे पहला कदम है, लिहाजा यह मुहिम रंग लाएगी। आईएमए के मुताबिक गन्दगी, खराब सेनिटेशन एवं कूड़ों का ठीक तरह से निस्तारण नहीं होने की वजह और खुले में शौच आदि ऐसे कारक हैं, जो देश में बीमारियों को तेजी से फैलाने का कारण बन रहे हैं।

 

इतना ही नहीं प्रत्येक वर्ष 3 लाख से अधिक बच्चों की 3 साल से पहले ही डायरिया की वजह से मौत हो जाती है। एसोसिएशन का मानना है कि मेडिकल पेशे से जुड़े लोग जनता को इस बात के लिए जागरुक करने में कारगर भूमिका निभा सकते हैं। एलकेम के उपाध्यक्ष महेश क्वाथेकर ने कहा कि हम लोगों तक यह सन्देश पहुँचाना चाहते हैं कि स्वच्छ भारत ही स्वस्थ भारत का निर्माण कर सकता है।

 

साभार : नवोदय टाइम्स 20 मई 2015   

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