धर्मगुरुओं ने स्वच्छता को अपनाने का दिया सन्देश

Friday, March 27, 2015 - 10:06

कुमार कृष्णन

 

दुनिया भर में स्वच्छता एक बड़ा और महत्वपूर्ण मुद्दा है, क्योंकि यह मानव और दुनिया के अस्तित्व से जुड़ा सवाल है। विभिन्न प्रकार के कचरे और गन्दगी के कारण वायु, पानी और मिट्टी तक प्रदूषित हो गए हैं। सरकारों के स्तर पर देश में विभिन्न प्रकार के कचरे के प्रबन्धन, उपचार और निपटान की नीतियाँ बनाई जा रही हैं। केन्द्र सरकार ने जहाँ स्वच्छ भारत अभियान चलाया है। वहीं मध्यप्रदेश सरकार ने स्वच्छ मध्यप्रदेश अभियान चला रखा है।

 

स्वच्छता का सवाल जितना व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण समाज और शासन के लिए है। प्राय: सभी मतों, सम्प्रदायों और धार्मिक ग्रन्थों में स्वच्छता का उल्लेख है। शारीरिक स्वच्छता से लेकर हवा, पानी और मिट्टी को स्वच्छ रखने की बात कही गई है। आम लोगों को विभिन्न धर्मों, सम्प्रदायों, पंथों में सन्निहित स्वच्छता के सन्देशों से अवगत कराने के मकसद से स्पंदन, यूनिसेफ, ग्लोबल इंटरफेथ वाश एलाइंस और इण्डिया वाटर पोर्टल ने सांची, मध्यप्रदेश में 'अन्त: पांथिक संवाद' का आयोजन किया। इस बात से हर कोई वाकिफ है कि आज भी समाज विभिन्न मतों पंथों के प्रतिनिधियों और विद्वानों की बातों पर अमल करता है। आध्यात्मिक मूल्य की बात करें तो स्वच्छता पहला आध्यात्मिक मूल्य है।

 

'अन्त: पांथिक संवाद' में दुनिया के विभिन्न धर्मों के गुरुओं, प्रतिनिधियों ने समाज की समृद्धि के लिए सामूहिक रुप से स्वच्छता अभियान चलाने की आवश्यकता बताई। साथ ही जारी सांची घोषणा पत्र में नैतिक शिक्षा को आधुनिक परिप्रेक्ष्य में सुधार कर आनिवार्य बनाने की बात कही। यह घोषणा पत्र तिब्बती नेता और बौद्ध गुरू सांमदोंग रिम्पोचे, स्वामी हनुत श्री, सैय्यद मुस्ताक अली नदवी, ज्ञानी दिलीप सिंह​, फादर साजी, स्वामी बलबीर दास, आचार्य रजनीश पवार, शेखर बाबा, डॉ. कायनात काजी के संयुक्त हस्ताक्षर से जारी किए गए। बच्चों और महिलाओं के कल्याण के मद्देनजर जारी इस घोषणा पत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि अज्ञान के कारण कई तरह की गन्दगियाँ विकसित होती है, अगर इनको कारगर ढंग से दूर किया जाए तो समाज को स्वर्ग बना सकते हैं। सभी ने खुले में शौच की प्रवृति खत्म करने की अपील की।

 

सभी धर्मगुरुओं के वक्तव्य पर अपनी टिप्पणी देते हुए तिब्बती नेता और बौद्ध गुरू सामदोंग रिम्पोचे ने कहा कि सभी धर्म आध्यात्मिक शिक्षा के साथ व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर सफाई पर जोर देते रहे हैं। तेजी से बदलती जीवन शैली मौजूदा समस्याओं की वजह है। इसके कारण मिट्टी, हवा और परिवेश अशुद्ध हो गए हैं। बौद्ध धर्म में स्वच्छता एक व्यापक विषय है। उन्होंने कहा कि नालन्दा, सारनाथ, और विक्रमशिला में जलनिकासी का बेहतर प्रबन्ध था। जिसका जिक्र हिन्द स्वराज में महात्मा गाँधी ने भी किया है।

 

मध्य प्रदेश यूनिसेफ के प्रमुख ट्रेवर क्लार्क ने कहा कि यूनिसेफ बच्चों के प्रति अत्यंत संवेदनशील है। स्वच्छता का सवाल बच्चों की मौत से भी जुड़ा है। प्रतिदिन एक हजार बच्चों की मौत सिर्फ डायरिया से होती है। तीस फीसदी लड़कियाँ युवावस्था में कदम रखते ही स्कूल छोड़ देती हैं। साथ ही खुले में शौच के कारण अनेक प्रकार की बीमारियां हो रही है। जिससे न सिर्फ विकास प्रभावित हो रहा है, बल्कि शिशु मृत्यु दर में भी बढ़ोतरी हो रही है। स्वच्छता का सवाल सम्मान, जीविका, सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं शिक्षा से जुड़ा हुआ है। यूनिसेफ के वाटर एण्ड सेनिटेशन से जुड़े अधिकारी जॉन्सन ने कहा कि भारत में 60900, नाईजीरिया में 241000, पाकिस्तान में 126000, इथीयोपिया में 9600, अफगानिस्तान में 79000, चीन में 64000, सूडान में 44000, माली में 42000, अंगोला में 39000 और युगांडा में 38000 पाँच साल से कम उम्र के बच्चों की मौत सिर्फ डायरिया से हुईं हैं। भारत में पाँच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु की संख्या दुनिया में सबसे अधिक है। भारत में प्रतिवर्ष 1,88,000 बच्चे सिर्फ डायरिया से मरते हैं। इनमें एक लाख बच्चे 11 माह की उम्र में ही मर जाते हैं।

 

मध्य प्रदेश का आलम यह है कि 313 में से 240 विकास खण्डों में 75 फीसदी से ज्यादा जनसंख्या खुले में शौच करती है। अनुसूचित जाति और जनजाति में स्वच्छता की उपलब्धता सामान्य से भी कम है। 19 फीसदी अनुसूचित जाति को और 8 फीसदी अनुसूचित जनजाति को ही शौचालय की सुविधा उपलब्ध है। उन्होंने विस्तार पूर्वक बताया कि ट्रांसमिशन साइकिल द्वारा किस प्रकार वातावरण दूषित होता है। शौचालय के प्रयोग से डायरिया, मलेरिया जैसी बीमारियों की रोकथाम की जा सकती है। धार्मिक नेता और गुरुओं ने कहा कि शौच के बाद एवं खाने से पहले साबुन से हाथ धोने और स्वच्छता सम्बन्धी अन्य प्रवृतियों को धार्मिक ग्रन्थों के आधार पर प्रचारित किया जाना चाहिए।

 

स्वामी हनुत श्री ने कहा कि स्वच्छता ईश्वर के करीब ले जाती है। नदियों के किनारे शहर स्वच्छता को ध्यान में ही रखकर बसाए गए थे। अब तो नदियाँ ही प्रदूषित हो गयी है। स्वच्छता के लिए पानी, मिट्टी और हवा का स्वच्छ होना बेहद जरूरी है। साफ-सफाई काफी महत्वपूर्ण है। काजी मुश्ताक अली नदवी ने कहा कि इस्लाम में पैगम्बर साहब ने पाकीजगी हासिल करने के सन्देश दिए हैं। वुजू और उसके नमाज इसी का नतीजा है। फादर साजी ने कहा कि बच्चों का जीवन स्वच्छता के बिना कठिन है। इससे पवित्र भाव का एहसास होता है। उपभोक्तावादी संस्कृति के कारण हम अपने मूल्यों को भूलते जा रहे हैं। स्वामी अनुपम ने कहा कि अब समाज को साथ लेकर चलने का समय आ गया है। ज्ञानी दिलीप सिंह ने गुरूवाणी में स्वच्छता के उल्लेख का जिक्र किया। वहीं जैन मुनि ब्रह्मचारी अमित जैन ने कहा 2600 साल से जैन धर्म में आठ तरह की स्वच्छता अपनाई जा रही है। धर्म ग्रन्थ में आठ तरह की शुद्धि का जिक्र भी किया गया है। डॉ. कायनात काजी ने इस्लाम धर्म में स्वच्छता के तौर तरीकों को बताया। इस मौके पर डॉ. अंजना गुप्ता, डॉ अनवर शफी ने भी अपने विचार रखे।

 

दो सत्रों में आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन पत्रकार गिरिश उपाध्याय ने किया। स्पंदन के सचिव अनिल सौमित्र ने कहा कि यह कार्यकम धर्मगुरुओं की उपासना पद्धति, परम्परा और शास्त्रों में स्वच्छता के महत्व को साझा करने का एक सशक्त माध्यम बनेगा। साथ ही समाज को प्ररित भी करेगा। इस कार्यकम में अनिल गुलाटी, इण्डिया वाटर पोर्टल के केसर सिंह, वरिष्ठ पत्रकार प्रसून लतांत के अलावा देश के विभिन्न हिस्सों से आए समाजकर्मियों ने हिस्सा लिया।

 

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