गाँवों के 8 करोड़ घरों में अभी शौचालयों की जरूरतः मन्त्री

Tuesday, March 17, 2015 - 10:12

गुड़गाँव। दुनियाभर में खुले में शौच जाने वालों की सबसे बड़ी आबादी भारत में है, जो कि हमारे लिए शर्म की बात है। हम शौचालय बना तो देंगे, परन्तु क्या उनका इस्तेमाल होगा, इसमें संशय है। यह बातें केन्द्रीय ग्रामीण विकास, पंचायती राज, पेयजल एवं स्वच्छता मन्त्री बीरेन्द्र सिंह ने गाँव कांकरौला-भांगरौला में राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल एवं स्वच्छता जागरूक सप्ताह की शुरूआत के मौके पर कहीं।

उन्होंने कहा कि 2019 में महात्मा गाँधी की 150वीं जयन्ती तक देश की 90 प्रतिशत जनसंख्या को नल का शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवाने का लक्ष्य है। उन्होंने स्कूली बच्चों को यह जिम्मेदारी दी कि वे यह देखें कि शौचालयों का प्रयोग हो। सरकार घर में शौचालय बनाने के लिए 12 हजार रुपए देती है। लेकिन दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि लोग उसका इस्तेमाल नहीं करते।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को अपनी सोच बदलनी होगी। शौचालय बनवाने के लिए साधनों की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि देश में 17 करोड़ घर हैं, जिनमें से लगभग 11 करोड़ घर ग्रामीण अंचल में है। इन ग्रामीण अंचल के घरों में से लगभग 8 करोड़ 80 लाख घरों में अभी भी शौचालय की सुविधा उपलब्ध करवाने की जरूरत है।

बीरेन्द्र सिंह ने ग्रामीणों से सीधा संवाद करते हुए कहा कि आप लोग खुश हो रहे होंगे कि अपने बच्चों को भैंस का दूध पिलाते हैं, परन्तु क्या कभी सोचा है कि वह भैंस उसी तालाब में पानी पीती है और नहाती है जिसमें गाँव का सारा गन्दा पानी जाता है। उन्होंने कहा कि इससे बीमारी फैलती है। साथ ही उन्होंने कहा कि बड़े गाँव मे शौचालय व स्नानघर के पिट तथा रसोई से निकलने वाले पानी को शोधित करने के लिए सरकार 20 लाख रुपए तक देगी ताकि उस पानी को खेत में सिंचाई के प्रयोग के लायक बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि अच्छा खाएंगे और अच्छे स्वच्छ वातावरण में रहेंगे तो हम ग्रामीणों का स्वास्थ्य अच्छा होगा जिससे स्वच्छ एवं स्वस्थ समाज की संरचना होगी।

सोमवार से शुरू किए गए राष्ट्रव्यापी जागरूकता सप्ताह का समापन 22 मार्च को नागालैंड के कोहिमा में होगा। केन्द्रीय ग्रामीण विकास राज्य मन्त्री राम कृपाल यादव ने कहा कि पेयजल संरक्षण और स्वच्छता बनाए रखने का अभियान तभी सफल होगा जब लोग इसमें सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि हालांकि हरियाणा में 94 प्रतिशत गाँवों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध है।

साभार : नेशनल दुनिया 17 मार्च 2015  

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