स्वच्छ भारत, मेक इन इण्डिया से गाँधीजी का सपना पूरा होगा : राष्ट्रपति

Monday, March 16, 2015 - 13:15

कुमार कृष्णन

नई दिल्ली। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि ‘स्वच्छ और समर्थ भारत’ के महात्मा गाँधी के सपने को पूरा करने में मदद करेंगे। यह बात उन्होंने विज्ञान भवन में ‘गाँधी के सपने का स्वच्छ और समर्थ भारत’ विषय पर दो दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय परिसंवाद का उद्घाटन करते हुए कही। इस दो दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय परिसंवाद का आयोजन राजघाट समाधि समिति ने किया था। इस दो दिवसीय संगोष्ठी में देश-विदेश के 1000 से भी ज्यादा गाँधीवादी, विद्वान, गाँधीवादी संस्थानों के प्रतिनिधिगण और शोधार्थी शिरकत कर रहे हैं।

राष्ट्रपति ने कहा,‘‘गाँधीजी का सपना हमारा सपना है। उनके सपने के साथ हमें एक स्वच्छ, हरे-भरे और आत्मनिर्भर भारत की मौजूदा चुनौतियों से निपटना चाहिए।’ इस दिशा में समाज की अहम भूमिका है और वे इस अभियान में सहभागी बनें और जनआन्दोलन का रूप दें। श्री मुखर्जी ने कहा कि भारत को नया रूप प्रदान करने के समन्वित प्रयासों से स्वच्छ और समर्थ भारत के गाँधीजी के सपने को पूरा करने में मदद मिलेगी। सरकार की दोनों महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘हाल ही में दो महत्वपूर्ण पहल शुरू की गईं हैं। गाँधीजी की 150वीं जयंती के मौके पर दो अक्टूबर, 2019 तक स्वच्छ भारत के उद्देश्य को हासिल करने के लिए स्वच्छ भारत मिशन और हमारे देश की निर्माण क्षमता को बढ़ाने के लिए  मेक-इन-इण्डिया अभियान आरम्भ किया गया है। श्री मुखर्जी ने कहा कि ‘मेक-इन-इण्डिया’ अभियान आत्मनिर्भर और निर्माणकारी भारत के गाँधीजी के सपने को पूरा करने की सोच वाला है। इसका उद्देश्य निवेश को प्रोत्साहित करके, अभिनव प्रयोग बढ़ाकर, कौशल विकास मजबूत करके और सर्वश्रेष्ठ श्रेणी का बुनियादी ढांचा स्थापित करके आर्थिक विकास के सभी मोर्चों पर भारत को समर्थ बनाना है।

राष्ट्रपति ने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान के लिए गाँधीजी ने तीन आयामों की कल्पना की थी जिनमें ‘एक स्वच्छ मस्तिष्क, एक स्वच्छ शरीर और स्वच्छ परिवेश’ शामिल है।  संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए शहरी विकास मन्त्री श्री एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि सरकार अगले पाँच वर्षों में देश को स्वच्छ बनाने के लिए स्वच्छ भारत मिशन को जन भागीदारी के साथ 'स्वच्छाग्रह' आन्दोलन में तब्दील करने की इच्छुक है। श्री वेंकैया नायडू ने कहा, 'महात्मा गाँधी के स्वच्छ भारत सपने को हमारा देश अब तक साकार नहीं कर पाया है। महात्मा गाँधी ने तकरीबन 100 साल पहले यह सपना देखा था। महात्मा गाँधी के लिए स्वच्छता उतनी ही महत्वपूर्ण थी जितनी कि राजनीतिक आजादी।' श्री नायडू ने कहा कि गाँधी जी से प्रेरणा लेते हुए देशवासियों को स्वच्छता पर विशेष जोर देना चाहिए और इसके साथ ही स्वच्छाग्रह को एक मिशन मानते हुए इसे एक जन आन्दोलन में तब्दील कर देना चाहिए। श्री नायडू ने यह भी कहा कि घटिया साफ-सफाई ही तकरीबन 80 फीसदी बीमारियों के लिए जिम्मेदार है। इसके अलावा हर साल देश के जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का तकरीबन 6 फीसदी इसमें लग जाता है।

इस मौके पर राष्ट्रपति ने राजधाट समाधि समिति के त्रैमासिक पत्रिका 'राजघाट' का लोकापर्ण भी किया। शहरी विकास मन्त्री की अध्यक्षता वाला वैधानिक निकाय है। शहरी विकास मन्त्री श्री नायडू ने राष्ट्रपति को गाँधी का चरखा भेंट किया। आरम्भ ने शहरी विकास मन्त्रालय के सचिव मधुसूदन ने आगत अतिथियों का स्वागत किया। उद्घाटन सत्र का संचालन राजघाट समाधि समिति के सचिव रजनीश कुमार ने किया। उद्घाटन सत्र का समापन शहरी विकास मन्त्री दुर्गाशंकर मिश्रा के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।

अन्तरराष्ट्रीय परिसंवाद के दूसरे सत्र का विषय था- ''गाँधी के सपनों का स्वच्छ भारत'। इस सत्र की अध्यक्षता हरिजन सेवक संघ के अध्यक्ष डॉ. शंकर सन्याल ने की। इस सत्र में बीज वक्तव्य देते हुए अन्तरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त गाँधीवादी चिंतक डॉ. रामजी सिंह ने कहा कि पाश्चात्य सभ्यता के तर्ज पर गन्दगी से मुक्ति् सम्भव नहीं है। महात्मा गाँधी ने एकादश व्रत और 18 रचनात्मक कार्य तय किए थे। रचनात्मक कार्यो में स्वच्छता का स्थान सातवें पर था। गाँवो की स्थिति खराब है। उन्होंने कहा कि सफाई के मामले में स्वावलम्बी होना चाहिए। जब तक युवाओं को प्रशिक्षित नहीं किया जाएगा, तब-तक स्वच्छता जनआन्दोलन नहीं बन सकता है। उन्होंने कहा कि श्रम और बुद्धि के विभाजन के कारण भारत की दुर्दशा हुई है। जब तक अन्यायपूर्ण व्यवस्था रहेगी, भारत समर्थ नहीं हो सकता है। वहीं गाँधी शान्ति प्रतिष्ठान की अध्यक्षा सुश्री राधा भट्ट ने कहा कि साफ जगह में जो तेज होता है, वह गन्दगी में लुप्त हो जाता है। हमारे देश में कचरा प्रबंधन की कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि गन्दगी फैलाना और उसमें रहना सबसे बड़ी हिंसा है। उन्होंने विकास के मॉडल पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि इससे मुश्किलें बढ़ी है। धरती, पानी सब जहरीला हो रहा है। उन्होंने कहा सफाई का अनुपालन राजनीति और समाजनीति में भी होना चाहिए। जब हमारी जीवन शैली स्वावलम्बी होगी, तभी भारत समर्थ होगा। के.एस ब्रजेन्द्र ने बच्चों को सफाई विज्ञान पढ़ाने की आवश्यकता बतायी। पत्रकार अवधेश कुमार ने कहा स्वच्छता के कार्यक्रम को महाक्रान्ति के अभियान के रूप में लेना होगा। दुनिया में ढ़ाई अरब लोग स्वच्छता से वंचित है। र्इ्श्वर की सेवा का आधार है स्वच्छता। स्वच्छता अभियान व्यक्ति को एकांगी से सामूहिकता की ओर ले जाता है। वहीं लिन्चबर्ग कॉलेज (यूएसए) के प्रो. अतुल गुप्ता ने कहा कि कॉरपोरेट आम लोगों के लिए नहीं है, उसकी नीतियाँ आमलोगों के नहीं है। पश्चिमी मॉडल से भारत समर्थ नहीं हो सकता है। इससे असमानता की खाई निरंतर बढ़ती जा रही है। भारत समर्थ होगा कुटीर उघोग से, ग्रामीण उद्योग से। इस सत्र के समापन पर पत्रकार पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ ने गाँधी विचारों पर हो रहे हमले पर भी सवाल खड़े किए और व्यापक स्तर पर प्रतिरोध की बात कही।

तीसरे सत्र का विषय था- ''गाँधी के सपनों का समर्थ भारत। इस सत्र की अध्यक्षता ग्लोबल ओपेन यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. पी.आर. त्रिवेदी ने की। इस सत्र में बीज वक्तव्य देते हुए इण्डियन कांउसिल आॅफ गाँधियन स्टडीज के चैयरमैन एन. राधाकृष्णन ने कहा कि गाँधी के सपनों का समर्थ भारत तभी बन सकेगा, जब गाँधी के आधार पर चिंतन करेंगे। देश, समाज की क्या आवश्यकता है, व्यक्तिगत आवश्यकता क्या है? इस पर गौर करना होगा। आजादी के 67 साल हो गए, लेकिन हमारी शिक्षा पद्धति का ढांचा अंग्रेजी पद्धति की तर्ज पर है। देश का बड़ा तबका कमजोर है। सामाजिक न्याय को अमल में नहीं लाए तो समर्थ भारत नहीं बन सकता है। बहस को आगे बढ़ाते हुए सेंटर फॅार गाँधियन स्टडीज, राजस्थान विश्वविद्यालय से आयीं डॉ. विद्या जैन ने कहा कि आधी आबादी अस्मिता के लिए संघर्षरत है। पिछले एक दशक में महिलाओं पर हो अत्याचारों में बढ़ोत्तरी हुई है। माँ की कोख से बाहर आने तक के लिए उसे संघर्ष करना पड़ रहा है। आधी आबादी के लिए समता का सवाल महत्वपूर्ण है। विकास के दो मॉडल का अवसान हो चुका है। अब गाँधी का रास्ता ही राह दिखाता है। भूमण्डलीकरण ने बाजारवाद व्यवस्था को ला दिया है। देहवादी बाजार है। जबकि गाँधी का मॉडल स्वावलम्बन और सम्मान की वकालत करता है।

एशियन पीस रिसर्च एण्ड एजुकेशन एसोसिएशन, दक्षिण अफ्रीका की डेप्युटी चेयरपर्सन डॉ. बेरनेडेट्टे मुथैथ्या ने गाँधी के दक्षिण अफ्रीका के संंघर्षो को विस्तार से रेखांकित किया। नेल्सल मंडेला ने गाँधी से बहुत कुछ सीखा और उन्हीं के बताए रास्तेे के आधार पर अफ्रीका में अश्वेतों के साथ अपमानजनक सलूक के खिलाफ नेल्सन मंडेला ने आवाज उठाई। वे गाँधी के बताए अहिंसा के रास्ते पर चले और यहीं से उन्हें विशाल कामयाबी मिलनी शुरू हुई. यह मंडेला का संघर्ष था कि जब दक्षिण अफ्रीका में अश्वेतों को वोट देने का अधिकार मिला, तो वहाँ बड़ी संख्या में रह रहे भारतीयों को भी यह हक दिया गया। उन्होंने कहा कि गाँधी के रास्ते से ही भारत समर्थ बनेगा। गाँधी आश्रम ट्रस्ट, नोवाखाली, बांग्लादेश के निदेशक राधा नवा कुमार ने कहा कि अक्तूबर 1946 में भड़के दंगों के बाद सद्भावना स्थापित करने के लिए महात्मा गाँधी नोवाखाली में एक विशेष शान्ति मिशन के लिए निकल पड़े। वहाँ उन्होंने 46 गाँवों का दौरा किया। आजादी के बाद जब गाँधीजी भारत वापस आ गए तो चारु चौधरी, जो तब पचासी साल के थे, उन्होंने जयग गाँव को चुना, जिसका दौरा गाँधीजी ने 26 जनवरी 1947 को किया था और जो उनकी शहादत के बाद नोआखाली के शान्ति मिशन का मुख्यालय बना। शान्ति मिशन कई उतार-चढ़ाव के दौर से गुजरा। यहाँ तक कि मिशन के कई कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई और कितनों की सम्पत्ति लूट ली गई। शेख मुजीबुर्रहमान ने बांग्लादेश की सत्ता सम्भालने के बाद आगे बढ़ कर मिशन को हरसम्भव सहयोग दिया।  नोआखाली का ग्रामीण क्षेत्र अपनी रूढ़िवादी जीवन शैली के लिए जाना जाता रहा है खासतौर से महिलाओं के प्रति, मगर ऐसे इलाके में बड़ी संख्या में मुसलिम महिलाओं ने बुरका पहनना छोड़ दिया है। नोआखाली के लिए यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह एक छोटी क्रान्ति के समान ही है। अब मुसलिम महिलाओं में जागृति आई है।  

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