‘साफ’ कितना है ‘साफ’

Thursday, February 26, 2015 - 15:35

आजकल लोग साफ-सफाई के मामले में बहुत ज्यादा सतर्क रहते हैं। चाहे खुद का मामला हो या बच्चों का, लोग ‘हाइजीन’ बरतना चाहते हैं। लेकिन क्या वाकई में हम जितनी साफ-सफाई रखते हैं, उससे हमारे स्वास्थ्य पर कुछ असर पड़ता है। जानिए, ऐसे ही कुछ रोचक तथ्य, जो सफाई के बारे में आपकी राय को और ज्यादा स्पष्ट करेंगे।

 

मानव शरीर है सूक्ष्म कीटाणुओं का घर

बाहरी तौर पर हम कीटाणुओं से बचने के लिए तमाम तरह के उपाय अपनाते हैं, पर क्या आपको पता है कि हमारा शरीर खुद असंख्य कीटाणुओं का घर है। मानव शरीर के अन्दर जीवाणु और कीटाणुओं की लगभग 1000 से ज्यादा जातियाँ पाई जाती हैं।

 

एन्टी-बैक्टीरियल सोप वाकई काम करता है!

कीटाणुओं से बचने के लिए आजकल लोग एन्टी-बैक्टीरियल साबुन का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन हाल में हुए एक शोध के अनुसार, एन्टी-बैक्टीरियल साबुन भी आम साबुनों जैसे ही होते हैं। बल्कि इसमे ‘ट्राईक्लोसन’ नामक एक तत्व पाया जाता है, जो कि हमारे शरीर में हार्मोन असन्तुलन का कारण बनता है।

 

नो फाइव सेकण्ड रूल

‘फाइव सेकण्ड रूल’ के मुताबिक, खाने को अगर पाँच सेकेण्ड के अन्दर खाया जाए तो बैक्टीरिया पैदा नहीं होते, लेकिन ऐसा नहीं है। अगर खाने का टुकड़ा जमीन पर गिर जाए तो पाँच सेकण्ड से कम समय में बैक्टीरिया हमला बोल देते हैं।

 

किचन सिंक होता है सबसे गन्दा

आपको यह लगता है कि आपका टॉयलेट घर की सबसे गन्दी जगह है, पर क्या आपको पता है कि आपके किचन का सिंक उससे भी ज्यादा गन्दा और बैक्टीरिया से भरपूर होता है। किचन सिंक में 100,000 से ज्यादा कीटाणु पाए जाते हैं, जोकि आपके टॉयलेट में भी न मौजूद हों।

 

दाँतो को ब्रश करना एक आम आदत

हम लोग सोचते हैं कि दाँतो को ब्रश करना एक आदत है, जिसे बच्चे-बड़े नियम से अपनाते हैं, लेकिन आपको पता है कि 15वीं शताब्दी से पहले दाँतो को ब्रश से साफ करने का कोई चलन नहीं था। अमरीका में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद लोगों के लिए दाँत ब्रश करना जरूरी कर दिया गया था। सबसे पहले अमरीकी सेना में इस नियम को जबरन लागू किया गया।

 

कैटरिंग में सफाई

वर्ष 2004 में हुए एक सर्वे में यह बात सामने आई कि कैटरिंग वर्कर्स में से 53 फीसदी बिना हाथ धोए खाना तैयार करते हैं। यहाँ तक कि 40 फीसदी तो वॉशरूम से आने के बाद भी हाथ तक नहीं धोते।

 

एअर ड्रायर या पेपर टॉवल

हाथ धोने के बाद पेपर टॉवल का इस्तेमाल हाथ सुखाने के लिए करना बेहतर होता है। यह एअर ड्रायर की तुलना में 60 फीसदी अधिक कारगर होता है। एअर ड्रायर का इस्तेमाल करने के बावजूद भी हाथों में नमी बरकरार रहती है, जो कि बैक्टीरिया को आमन्त्रण देने का काम करती है। इसके अलावा एअर ड्रायर के प्रयोग से बिजली की खपत भी ज्यादा होती है।

 

कालीन में धूल

आपके घर में कालीन बिछा है तो कालीन का इस्तेमाल नहीं करने वाले घरों की तुलना में आपके घर में 10 गुना ज्यादा धूल और गन्दगी होगी। कालीन धूल और गन्दगी को सबसे ज्यादा अवशोषित करता है।

 

साभार : राजस्थान पत्रिका 25 फरवरी 2015

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