चीन में छह दशक पहले ही स्वच्छता के लिए पहल शुरू हो गई थी

Friday, December 5, 2014 - 18:32

ईशा सिंह

सन् 1949 में स्वतंत्रता की घोषणा के बाद चीन के साम्यवादी दल ने ग्रामीण जल-आपूर्ति एवं स्वच्छता पर विशेष जोर देना आरंभ किया। शहरी एवं ग्रामीण चीन में स्वच्छता सुविधाओं के निर्माण के लिए प्रथम विशिष्ट आंदोलन सन् 1978 में शुरू हुआ, जिसे पैट्रिऑटिक हाइजीन मूवमेंट कहा गया। नेशनल पैट्रिऑटिक हाइजीन मूवमेंट आयोग कार्यालय द्वारा ग्रामीण स्वच्छता पर किए गए एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार, इस आंदोलन ने 1993 ई. में विशेष गति प्राप्त की। यह पता चला कि 85.9 प्रतिशत परिवारों को शौचालय उपलब्ध हैं, परंतु सिर्फ 7.5 प्रतिशत के पास ही स्वच्छ शौचालय हैं (शेन, 2006)। सर्वेक्षण के परिणामों से यह पता चला कि चीन में खुले में शौच न्यूनतम है, परंतु अधिकतर आबादी जिन शौचालयों का इस्तेमाल करती थी, वह घर के पिछले आंगन में निर्मित एक छेद मात्र होता था, जिसमें सफाई एवं स्वच्छता का अभाव था। चीनी सरकार ने इस स्थिति का जायजा लिया तथा सन् 1990 के दशक में राष्ट्रीय विकास योजना में स्वच्छता आंदोलन को शीर्ष प्राथमिकताओं में से एक माना। इस आलेख में हमने विस्तारपूर्वक चीन में स्वच्छता की वर्तमान स्थिति के साथ ही सरकारी योजनाओं एवं कार्यक्रमों के संदर्भ में स्वच्छता के क्षेत्र में प्रयुक्त तकनीकों पर प्रकाश डाला है।
 
एनपीएचसीसी को 30 मंत्रालय का मिलता है सहयोग

नेशनल पैट्रिऑटिक हेल्थ कैम्पेन कमिटी (एनपीएचसीसी) चीन के केंद्रीय निकाय के रूप में उत्तरदायी है, जो ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में स्वच्छता के लिए किए गए प्रयत्नों को निर्देशित करता है। यह स्थानीय एवं राष्ट्रीय दोनों ही स्तरों पर समन्वय एवं प्रोत्साहन के लिए भी जिम्मेदार है। एनपीएचसीसी में राष्ट्रीय स्तर पर लगभग 30 मंत्रालयों एवं आयोगों, जैसे स्वास्थ्य मंत्रालय, निर्माण मंत्रालय, कृषि मंत्रालय, जल संसाधन मंत्रालय, राज्य पर्यावरण संरक्षण प्रशासन इत्यादि के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल होते हैं (मेंग शूचेन, 2004)। ग्रामीण जल आपूर्ति एवं स्वच्छता योजना के एक अंग के तौर पर चीनी सरकार की सन् 2015 (आईआरसी 2009) तक उन्नत स्वच्छता आच्छादन में 75 प्रतिशत तक वृद्धि करने की योजना है। बड़ी संख्या मे स्वच्छ शौचालय निर्माणधीन, लेकिन विश्व बैंक के अनुमान (2010) के अनुसार, 426 मिलियन लोगों के पास अभी तक उन्नत स्वच्छता सुविधा का अभाव था।

उन्नत स्वास्थ्य सुविधओं का इस्तेमाल (प्रतिशत में)

कुल

64 प्रतिशत

उन्नत स्वास्थ्य सुविधओं का इस्तेमाल (प्रतिशत में)

कुल नगरीय

74 प्रतिशत

उन्नत स्वास्थ्य सुविधओं का इस्तेमाल (प्रतिशत में)

कुल ग्रामीण

56 प्रतिशत

(युनिसेफ, 2011)

भारत की तरह चीन में भी सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक तौर पर स्वच्छता शीर्ष प्राथमिकता पर नहीं मानी जाती थी। चीन में शौचालयों को लंबे समय तक पर्यटकों एवं स्थानीय लोगों द्वारा गंदी, घृणित एवं बदबूदार जगह माना जाता था। 90 के दशक में आर्थिक विकास के साथ ही देश में शौचालय क्रांति की भी शुरुआत हुई। सन् 2008 में ओलंपिक से पहले सरकार ने पर्यटकों की सुविधा के लिए सार्वजनिक शौचालयों को स्वच्छ एवं नवीनीकृत करने का पहल किया। इसी वर्ष ओलंपिक में बोली लगाने की तैयारी के एक भाग के रूप में चीन ने 305 पर्यटक स्थलों पर 452 सार्वजनिक शौचालयों का पुनर्निर्माण किया और उन्हें शून्य से लेकर चार सितारों तक में वर्गीकृत किया (न्यूयॉर्क टाइम्स, 2012)। वर्तमान समय में चीन करीब 19 मिलियन शौचालय प्रतिवर्ष खरीदता है, जो औद्योगिक अनुमानों के अनुसार संयुक्त राज्य में ऐसी संख्या की तुलना में दुगुना है, जो बड़े पैमाने पर इसके इस्तेमाल और स्वच्छता के महत्व को दर्शाता है (न्यूयॉर्क टाइम्स, 2012)।
 
चीन में स्वच्छता अभियान ने सरकार के प्रयासों एवं समन्वित नीति से गति प्राप्त की है और ग्रामीण तथा शहरी स्वच्छता सुधार सुविधाओं की सामुदायिक मांग पर आधारित दृष्टिकोण अपनाया गया है।
 
चीन के ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं हैं (जल आपूर्ति एवं स्वच्छता सहयोगात्मक परिषद्, 2009)-
1. वर्ष के आरंभ में काउंटी स्तर पर मांग पंजीकरण के माध्यम से निर्माण की मांग और प्रचार-प्रसार द्वारा स्वच्छता को बढ़ावा देना।

2. गैर प्रदूषणकारी शौचालयों के छह प्रकारों को प्रचारित तथा प्रोत्साहित करना (डबल अर्न्स, बायोगैस, तीन खंड, मल-मूत्र-पृथक्करण के साथ इको शौचालय, फ्लश शौचालय तथा ट्वीन पिट ऑल्टरनेटिंग शौचालय (ग्रामीण घरों के लिए)। परिवार उस शौचालय का चुनाव कर सकते हैं, जो उनके लिए सर्वाधिक उपयुक्त हो एवं उनकी जरूरतों को पूरा करता हो।

3. ग्रामीण शौचालयों के लिए हार्डवेयर सब्सिडी योजना।

4. एक मजबूत अनुश्रवण प्रणाली, जिसकी नजर परिमाण एवं गुणवत्ता दोनों पर केंद्रित हो (निर्माण एवं उपयोग)।

5. केंद्र सरकार से लेकर गांवों तक प्रत्येक स्तर पर लक्ष्य निर्धारित करना, जिसका पालन करने पर अधिकारियों का मूल्यांकन हो। यदि आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं होती तो फंड की राशि में कटौती की जाती है, जिससे काम करने का दबाव बनता है।

6. क्षेत्र-विस्तार एवं स्वच्छता-मानकों को प्राप्त करने के लिए सरकार ने प्रत्येक वर्ष कई लाख ऐसे शौचालयों के निर्माण पर जोर दिया है, जो न्यूनतम मानकों को पूरा कर सकें, जो प्रदूषण-रहित हों तथा गृह-परिसर के अंदर ही निपटान कर सकें।

7. सरकारी मापदंड के अनुसार, स्वच्छ शौचालयों में जल-रोधक भूमिगत खंड होना चाहिए, जिससे मक्खियों, कीड़ों और दुर्गंध की रोकथाम की जा सके और जिसके ऊपर कमरा बना हो। छह पूर्व चयनित शौचालय मॉडल उपलब्ध है, प्रारंभिक से लेकर उन्नत किस्म तक।
 देश के कुछ हिस्से पानी की जबर्दस्त कमी से जूझ रहे हैं, इस कारण फ्लश शौचालय पूर्णतः उपयुक्त नहीं हैं इसलिए सरकार कुछ ऐसे तकनीकी डिजाइनों को बढ़ावा दे रही है, जिनमें फ्लश करने एवं खाद बनाने के लिए कम पानी की आवश्यकता हो।
 
चीनी सरकार (शेन, 2006) द्वारा वर्तमान में प्रचारित एवं निर्मित कुछ तकनीकी विकल्प निम्न वर्णित हैं-

 
1. तीन कंपार्टमेंट वाला सेप्टिक टैंक- तीन खंडों वाला सेप्टिक टैंक अपशिट जमा करता है और कुल मिलाकर 50 दिनों में कम से कम पानी का इस्तेमाल करता है (लगभग 2 लीटर प्रति फ्लश)। इस टैंक में अपजल नहीं छोड़ा जाता तथा इसके निपटान के लिए दूसरी व्यवस्था की जाती है। प्रथम खंड में ठोस अंश इक्ट्ठा होता है, दूसरा जीवाणु-संबंधी डायजेशन चैंबर होता है तथा तीसरे खंड में उर्वरक के रूप में इस्तेमाल करने के पूर्व अपजल को एकत्र किया जाता है (प्लान इंटरनेशनल, 2007)। सन् 2003 (शेन, 2006) के आंकड़ों के अनुसार, चीन में कुल तीन कंपार्टमेंट वाले स्वच्छ शौचालय 27.22 प्रतिशत हैं। यह तकनीक व्यापक रूप से हेनान, फुजीएन, शंघाई, ग्वांग्डांग एवं झेजियांग प्रांतों में आगे बढ़ाई जा रही है।

2. डबल अर्न- इस प्रकार के शौचालयों में जमीन के अंदर कलश (अर्न) के समान दो गड्ढे होते हैं और कंक्रीट का ढाला हुआ स्लैब होता है, जिसके साथ ही अपशिष्टों के प्रवाह के लिए एक छेद बना होता है तथा बैठने के लिए पांवदान निर्मित होता है एवं धूप, बारिश से बचाव तथा सुरक्षा के लिए एक सुपर स्ट्रक्चर का निर्माण किया जाता है। सामने वाला कलश (अर्न) छोटा होता है, जिसमें अपशिष्ट एकत्र होता है। कुछ समय के डायजेशन के बाद इसका तरल पदार्थ (अपजल) नीचे वाले कलश (अर्न) में एक पाइप द्वारा चला जाता है। इस तरह नीचे वाला अर्न मुख्यतः अपजल को एकत्र करने के लिए होता है और इसके ऊपर एक कंक्रीट स्लैब रहता है, जिसके द्वारा दुर्गंध के फैलने और बाहर का पानी कलश में जाने से रोका जाता है। वर्ष 2003 तक चीन में कुल स्वच्छ शौचालयों के 9.81 प्रतिशत शौचालय ही इस प्रकार के होते थे। इस तकनीक का प्रयोग हेनान, जिन ज्यांग और ग्वांग्डांग प्रांतों में ही ज्यादा हुआ है।
 
3. बायोगैस- इस प्रकार के शौचालयों में बैठने का पैन, पाइप, अपशिष्ट के लिए चैंबर और एक बायोगैस रिएक्टर होते हैं। इसमें बैठे का पैन होता है, जिसके नीचे अपशिष्ट के लिए पाइप जुड़ा रहता है।
 
4. अपशिष्ट- प्रवाह-पाइप को विभाजित कर एक दूसरा प्रवेश मार्ग तैयार किया जा सकता है, जिसका प्रयोग जानवरों के अपशिष्ट के लिए किया जाता है। अपशिष्ट-निकास-चैंबर का उपयोग मुख्यतः शोधित अपजल के लिए किया जाता है (प्लान इंटरनेशनल, 2007)।
 
5. चीन में कुल स्वच्छ शौचालयों का 8.41 प्रतिशत बायोगैस पर आधारित है। इस तकनीक को ग्वांग्सी  एवं सिचुआन प्रांतों एवं अन्य क्षेत्रों में व्यापक पैमाने पर आगे बढ़ाया जा रहा है।
 
6. यूरीन (मूत्र) अलगाव- अलगाव शौचालयों में दो निकास-मार्ग एवं दो संग्रह प्रणालियां होती हैं। इन्हें पृथक रखने के लिए एक का इस्तेमाल मूत्र और दूसरे का अपशिष्ट के लिए होता है। शौचालयों को मक्खियों एवं अन्य कीड़े-मकोड़ों के साथ ही संभावित दुर्गंध से बचाने के लिए अपशिष्ट-निकासों के ऊपर एक ढ़क्कन होता है। मूत्र-संग्रह-पाइप बैठने के पैन के सामने मूत्र के लिए छेद और मूत्र-संग्रह-टैंक के मध्य जुड़ा रहता है। चीन में कुल स्वच्छ शौचालयों के 0.54 प्रतिशत ही मूत्र-अलगाव शौचालय हैं (शेन, 2006)।इस तकनीक का व्यापक स्तर पर शांगडौंग और ग्वांगसी प्रांतों एवं अन्य क्षेत्रों में प्रसार किया जा रहा है।

7. प्रवाही (फ्लश) शौचालय- यह प्रणाली वाटर-सील बैठने के पैन या पेडेस्टलसीट से सफाई की सामग्री और अपशिष्टों को प्रवाहित करने के लिए जल पर निर्भर रहती है। प्रवाहित मानव-अपशिष्ट तथा अपजल सामान्यतः सोक-पिट में जाता है, जो शौचालय इकाई के नीचे या उसके बराबर में निर्मित हो सकता है।
 
पोर-फ्लश शौचालयों का निष्कासन वाल्ट या सेप्टिक टैंक तथा छोटे बोर वाली सीवर प्रणाली में किया जा सकता है (प्लान इंटरनेशनल, 2007)। चीन में कुल स्वच्छ शौचालयों के 6.49 प्रतिशत प्रवाही शौचालय हैं, जिनका प्रसार बड़े पैमाने पर हेबेई तथा हुबई प्रांतों में किया जा रहा है (शेन, 2006)।
 
8. अन्य- अन्य शौचालयों में अपशिष्ट एवं मूत्र-अलगाव के साथ शौचालय, सीवर-प्रणालियों सहित शौचालय, बेहतर वायु-संचार-युक्त शौचालय, गहरे गड्ढे वाले शौचालय, दो गड्ढे वाले शौचालय इत्यादि शामिल हैं। दो पिट वाले शौचालयों में पारंपरिक शौचालय के ढांचे के नीचे में दो पिट होते हैं। (एनपीएचसीसी वार्षिक रिपोर्ट, 2002) चीन में वर्ष 2003 में उपर्युक्त में से किसी न किसी तकनीक का प्रयोग कुल स्वच्छ शौचालयों के 47.50 प्रतिशत है।
 
मांग एवं स्वच्छता को प्रोत्साहन

चीन में स्वच्छता अभियान की एक प्रमुख विशेषता के रूप में प्रत्येक वर्ष के आरंभ में अनुरोध के आधार पर काउंटी विशेष के लिए बजटीय आवंटन किया जाता है। वर्ष के आरंभ में परिवार अपनी मांग का पंजीकरण करवाता है (आईआरसी 2009)। शौचालयों के लिए हार्डवेयर सब्सिडी के साथ ही स्वच्छता और सफाई की शिक्षा एवं प्रसार भी संपूर्ण कार्यक्रम का हिस्सा है। द पैट्रिऑटिक हाइजीन कमेटी इश्तहारों तथा सरकारी टीवी पर एवं संदेशों द्वारा इस कार्यक्रम का प्रचार करती है तथा स्थानीय महिलाओं एवं युवा दल घर-घर जाकर इस अभियान को प्रचारित करते हैं।
 
घरों में एक बार स्वच्छ शौचालयों की स्थापना हो जाने पर स्थानीय तकनीकी-इकाई प्रत्येक तीन महीने पर इसका निरीक्षण करती है तथा उसके समुचित उपयोग एवं देखभाल के लिए अतिरिक्त जानकारी एवं शिक्षा उपलब्ध कराती है।
 
जिम्मेदारी

प्रत्येक स्तर पर कार्यरत इकाई अपने से निचले स्तर की इकाइयों के कार्यों का अनुश्रवण करने के लिए जिम्मेवार होती है।

स्वच्छता के प्रति जागरूकता 1940 ई. के प्रारंभ से ही हो गई थी, परंतु शहरों में जल-मल का स्वच्छीकरण 1980 ई. तक शुरू नहीं हुआ था। चीन में 1980 ई. तक किसी भी नगर-निगम में जल-मल को शुद्ध करने का संयंत्र नहीं लगा था। नेशनल पैट्रिऑटिक हाइजीन मूवमेंट आयोग कार्यालय द्वारा ग्रामीण स्वच्छता पर किए गए एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार, इस आंदोलन ने 1993 ई. में विशेष गति प्राप्त की। यह पता चला कि 85.9 प्रतिशत परिवारों को शौचालय उपलब्ध हैं, परंतु सिर्फ 7.5 प्रतिशत के पास ही स्वच्छ शौचालय हैं।

प्रत्येक काउंटी कार्यालय को हर घर से संगृहित ब्यौरा राज्य स्तर पर इकट्ठा करके नेशनल पैट्रिऑटिक हेल्थ कैंपेन कमिटी कार्यालय में जमा कराना होता है। यह जिम्मेदारी इस संस्था की ही होती है कि वह राष्ट्रीय ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम को सभी वांछित स्तरों पर लागू करे (मेंग शुचेन, 2004)। अगर किसी काउंटी या प्रांत का कार्य संतोषप्रद नहीं होगा तो अगले वित्त-वर्ष में उसके लिए आवंटित राशि घटा दी जाएगी। ऐसा होने से काउंटी और प्रांत दोनों स्तरों पर बहुत प्रतिस्पर्द्धा रहती है, ताकि उसका कार्य सभी स्तरों पर संतोषप्रद रहे। इस प्रकार इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से निबटने के लिए संख्यात्मक और गुणात्मक दोनों मानकों का उपयोग किया जाता है। प्रत्येक अधिकारी अपने से ऊपर के स्तर के पदाधिकारी के साथ योजना और लक्ष्य पर हस्ताक्षर करता है। ऐसी प्रशासकीय व्यवस्था के कारण आपस में सार्थक तालमेल बना रहता है, जो अत्यंत ही सरल और सहज प्रशासनिक प्रक्रिया है।
 
बावजूद इसके जनसंख्या का एक विशाल भाग स्वच्छता की उन्नत सुविधा से वंचित है, यह अनुपात 26 प्रतिशत शहरों में तथा 44 प्रतिशत ग्रामीण इलाकों में है (सीआईए 2013)।
 
देश के विभिन्न भागों में विशाल असमानताएं हैं। यहां स्वच्छता के क्षेत्र में, विशेषकर किसानों के मध्य में यह विषमता प्राकृतिक, जनसांख्यिकीय और सामाजिक-आर्थिक स्थिति की भिन्नता में भी है।शहरों में मलजल और कूड़ा-संचयन, उनके परिवहन और निषपादन की काफी कमियां हैं। कूड़े के निष्पादन का अनुपात बहुत ही न्यून है। चीन में जो भी दर्शनीय स्थल हैं, वहां कूड़ा और सीवेज निष्पादन प्रणाली तथा क्षमता की कमी है, परिणामस्वरूप दर्शनीय स्थलों पर सड़ांध और बदबू फैली रहती है, जिसके कारण पर्यटक कम आकर्षित होते हैं।
 
उपर्युक्त तथ्यों को देखते हुए स्वच्छता पर विमर्श तब तक अधूरा रहेगा, जब तक अपजल शोधन प्रणाली में विस्तार तथा सुधार नहीं हो।
 
यद्यपि स्वच्छता के प्रति जागरूकता 1940 ई. के प्रारंभ से ही हो गई थी, परंतु शहरों में जल-मल का स्वच्छीकरण 1980 ई. तक शुरू नहीं हुआ था। चीन में 1980 ई. तक किसी भी नगर-निगम में जल-मल को शुद्ध करने का संयंत्र नहीं लगा था (ओईसीडी 2004)। शहरी विकास और आवास मंत्रालय ने, जो शहर के जल तथा स्वच्छता प्रबंधन के लिए वित्त पोषित करता है तथा जल और स्वच्छता सुविधाओं के लिए नीति निर्धारित करता है, ने बड़े पैमाने पर इन क्षेत्रों के विकास के लिए मार्गदर्शक सिद्धांतों को तय किया। 11वीं पंचवर्षीय योजना के तहत 11वें गाइड-लाईन के अंतर्गत केंद्र सरकार ने (2007-2011) 1,60,000 किमी मलजल के लिए पाइप-लाईन बैठाने का नक्शा तैयार किया। लेकिन 2010 ई. के अंत तक मात्र 70,000 किमी में ही पाइप-लाईन बिछाए गए। 12वीं पंचवर्षीय योजना में सरकार ने इस मद में 430 बिलियन येन जल-संरचना-प्रबंधन हेतु खर्च करने की योजना बनाई है, जिसके तहत 159,000 किमी के लिए जल-आपूर्ति के लिए पाइप बैठाने का प्रस्ताव है (ग्लोबल वाटर इंटेलिजेंस 2012 का रिपोर्ट)। आवंटित राशि में से दो-तिहाई धन जल-सीवरेज-नेटवर्क के विस्तार पर खर्च होगा। यह राशि पिछली योजना में आवंटित राशि से 20 प्रतिशत अधिक है। 10 बिलियन येन मलजल निष्पादन के लिए संयंत्रों के निर्माण पर खर्च होगा। इस पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत देश में अवस्थित नदियों और जलाशयों में जल की गुणवत्ता सुधार के लिए व्यापक प्रबंधक किया जाएगा। इससे मलजल की उन्नत तकनीक की मांग बढ़ेगी।

 

निष्कर्ष
चीन में बड़े पैमाने पर स्वच्छता सुविधाओं के विषय में जानकारी का अभाव है। आवश्यकता है बड़े पैमाने पर सतत और टिकाऊ स्वच्छता के लिए व्यवहार और पुरानी आदतों को बदलने तथा इस संबंध में जागरूकता फैलाने की।

साभार : सुलभ इंडिया, जुलाई 2013
 
 

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