सामुदायिक श्रमदान से सफल हुआ सफ़ाई अभियान

Friday, December 5, 2014 - 18:32

अवनीश सोमकुवर

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 160 किमी दूर हरदा जिले के घने जंगलों में स्थित केलझिरी गांव के निवासी व बारहवीं कक्षा के छात्र अमरलाल का एक सपना तब साकार हुआ जब उनके गांव के लिए शौचालय बना। खुशी से उत्साहित राहतगांव सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल के इस विद्यार्थी ने कहा कि मैंने फिल्मों में तो शानदार शौचालय देखे थे, लेकिन अब अपने गांव में इन्हें बना देख कर मुझे आश्चर्य हो रहा है। अमरलाल की नजर में ये शौचालय कोई विलासिता की वस्तु नहीं बल्कि एक आवश्यकता है।

असलियत यह कि अमरलाल को पता नहीं कि दुनिया के दूसरे नंबर के सबसे धनी व्यक्ति बिल गेट्स ने अपनी पिछली भारत यात्रा के दौरान भारत की जनता द्वारा अपने रहन-सहन की परिस्थितियां सुधारने की कोशिश की सराहना की थी और उसे जन स्वास्थ्य कार्यक्रमों में सहायता देने का भरोसा दिलाया था। केल्झिरी में कुल 45 कोर्कू जनजातीय परिवार रहते हैं। अब उनके घरों में सर्वसुविधा संपन्न शौचालय है और उनका गांव ‘खुले में शौच मुक्त’ गांव घोषित किया जा चुका है। 1999 में भारत सरकार ने इस गांव में ‘पूर्ण स्वच्छता अभियान’ के तहत एक व्यापक कार्यक्रम चलाया था जिसका लक्ष्य था खुले में शौच जाने की परंपरा का अंत करना। सरकार ने 2017 तक गांव में खुले में शौच जाने की परंपरा समाप्त करने का लक्ष्य रखा और भारत सरकार ने ‘निर्मल ग्राम पुरस्कार’ की शुरुआत की। इसके अंतर्गत उन संस्थानों और व्यक्तियों को पुरस्कृत किया जाता है जिन्होंने विनिर्दिष्ट क्षेत्र में साफ-सफाई व्यवस्था लाने में सहायता की है। इन्हें नकद पुरस्कार दिया जाता है। केल्झिरी इस पुरस्कार को प्राप्त करने का पात्र बन सके, इसके लिए दो अन्य ग्रामों को भी यही स्थिति प्राप्त करनी होगी।

शौचालयों का निर्माण ग्राम वन संरक्षण समिति ने करवाया है जिन्होंने इस काम में 1,355 हेक्टेयर भूमि में उपजे सागवान के वृक्षों की लकड़ी बेच कर लाभ कमाया। यह भूमि उन्हें वन संरक्षा के लिए सौंपी गई थी। इस संबंध में राज्य सरकार ने फैसला किया था कि सागवान की लकड़ी बेच कर जो धनराशि मिल सकेगी उससे शौचालय बनाए जाएंगे। गांव के सभी 450 लोगों ने साफ-सफाई की जरूरत महसूस की और यह फैसला किया। उन्होंने अपनी इच्छानुसार ये विचार बनाए और उन्हें मूर्त रूप देने की कार्रवाई की। ग्राम संरक्षा समिति के अध्यक्ष श्री गुलाब ने उत्साह के साथ बताया कि चर्चा के दौरान, मिलने वाले पैसे से शौचालय बनाने का विचार कैसे उनके मस्तिष्क में आया। उन्होंने बताया उस परियोजना में 19,96,000 रुपये का लाभ हुआ। अनेक योजनाएं बनाई गईं लेकिन शौचालयों के निर्माण को प्राथमिकता दी गई।

समिति ने इस आशय का एक प्रस्ताव पास किया और इसकी सूचना उन्होंने वन विभाग के चीफ कंजर्वेटर बी.के. सिंह को दी जिनके कार्यक्षेत्र में यह वन क्षेत्र आता है। बड़वानी ग्राम पंचायत में केल्झिरी का प्रतिनिधत्व करने वाले सक्रिय पंच श्री राजेश ठाकुर ने बताया कि ‘हमें अपने प्रस्ताव को लेकर आशंकाएं थीं, लेकिन श्री बी.के. सिंह के समर्थन से उत्साहित होकर हमने नवंबर 2011 में निर्माण शुरू करवाया। उन्होंने डिजाइन तय करने में हमारी मदद की। हर परिवार से श्रमदान मिला जिससे श्रम की लागत में किफायत सहायता मिली। मार्च 2012 में निर्माण पूरा हो गया।

75 वर्षीय साबूलाल का कहना है कि वर्षों से हमारे ग्रामवासी नदी तट का इस्तेमाल शौच जाने के लिए करते रहे हैं। बारिश के दिनों में हमें बहुत परेशानी होती थी। खासतौर से महिलाओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। अब ये शौचालय हमारे लिए इज्जत के प्रतीक हैं और इससे बीमारियां दूर रहती है।

श्री बी.के.सिंह के अनुसार इन शौचालयों की सबसे ख़ास बात यह है कि इनका निर्माण बढ़िया हुआ है। ये अब अगले 50 वर्षों तक चलेंगे। नल आदि में बढ़िया गुणवत्ता वाला सामान इस्तेमाल किया गया है। ऊपर 500 लीटर क्षमता के टैंक रखे गए हैं। अच्छी टाइल्सें लगाई गई हैं। टिकाऊपन सुनिश्चित करने के लिए हर शौचालय को 10,000 लीटर क्षमता के ओवरहेड टैंक से जोड़ा गया है। हर यूनिट की लागत 2,39, 000 आई है।

 

शौचालयों का निर्माण ग्राम वन संरक्षण समिति ने करवाया है जिन्होंने इस काम में 1,355 हेक्टेयर भूमि में उपजे सागवान के वृक्षों की लकड़ी बेच कर लाभ कमाया। यह भूमि उन्हें वन संरक्षा के लिए सौंपी गई थी। इस संबंध में राज्य सरकार ने फैसला किया था कि सागवान की लकड़ी बेच कर जो धनराशि मिल सकेगी उससे शौचालय बनाए जाएंगे। गांव के सभी 450 लोगों ने साफ-सफाई की जरूरत महसूस की और यह फैसला किया।

केल्झिरी में सबसे बढ़िया बात यह रही कि यहां सारा निर्माण भूतल पर हुआ। जरूरी पानी बोरवेल से मिल जाता इससे ये शौचालय लंबे समय तक चलते रहेंगे। पास ही अजनार बहती है जो नर्मदा की सहायक नदी है। इसके कारण यहां भूजल का स्तर गर्मियों में भी कम नहीं होता। समिति के एक सदस्य श्री रामलाल ने बताया कि वन संरक्षा समिति के अंतर्गत एक कार्यकारणी गठित की गई है जो आने वाली परेशानियों को दूर करती है। जल सफाई व्यव्स्था को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि बोरवेल से 10,000 लीटर क्षमता वाल टैंक प्रातःकाल भर दिया जाता है। इसके बाद सभी 45 शौचालयों के ओवरहेड टैंक भरे जाते हैं। बिजली बिल का भुगतान समिति करती है। हर महीने औसतन रुपये 500 का बिल आता है। हर शौचालय एक सेप्टिक टैंक से जुड़ा है। शौचालयों के पास हम पेड़ लगा रहे हैं ताकि पानी बेकार न जाए और उसका भी इस्तेमाल हो सके।

 

केल्झिरी में एक प्राइमरी स्कूल, एक मिडिल स्कूल और एक आंगनवाड़ी है। मिडिल स्कूल में 42 और प्राइमरी स्कूल में 80 बच्चे पढ़ने आते हैं। इसी परियोजना के अंतर्गत आंगवाड़ी केंद्र और स्कूलों के पहले से चल रहे शौचालयों की भी मरम्मत कराई जा रही है।

मीठीबाई सारे इसे अपने गांव और परिवार की शान बढ़ाने वाली संपत्ति मानती हैं। उनका कहना है कि बहुत जल्दी करीब 100 किशोर किशोरियां वयस्क हो जाएंगे। अब बहुओं को जिल्लत नहीं उठानी पड़ेगी। गांव की मुश्किलें हमेशा के लिए खत्म हो चुकी है। अब केल्झिरी का जनजीवन नये सिरे से शुरू होगा।

बडवानी ग्राम पंचायत की सरपंच उर्मिला बाई चौधरी के अनुसार केल्झिरी ने अब अपनी अलग पहचान बना ली है। साफ-सफाई के इस अभियान में उनकी भूमिका के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि ग्राम वन संरक्षण समिति में जो भी फैसला किया, उन्होंने उसका सम्मान किया एवं उसे अपना नैतिक समर्थन दिया। महत्व की बात यह रही कि इसके लिए हर परिवार ने प्रतिबद्धता और उत्साह दिखाया। इस ग्राम से प्रेरणा पाकर अब इसी इलाके के खूंटी और बड़वानी भी केल्झिरी के रास्ते पर चलने की तैयारी कर रहे हैं।

यह परियोजना कितनी सफल रही, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब लोग कहने लगे हैं कि अगर केल्झिरी ऐसा कर सकता है तो हम क्यों नहीं। अब आस-पास के ग्रामवासी भी वैसा ही करना चाहते हैं जैसा केल्झिरी वालों ने कर दिखाया है।

आस-पास के समृद्ध ग्रामवासी जो करना चाहते हैं वह केल्झिरी वालों ने कह दिया। अब यह एक अग्रणी गांव बन गया है। यह कहना है कक्षा 9 के छात्र अर्जुन का।

बड़वानी ग्राम पंचायत के ज्ञान सिंह तोमर का कहना है कि ‘केल्झिरी को खुले में शौचमुक्त गांव’ तब तक नहीं घोषित किया जाना चाहिए जब तक पड़ोस के खूंटी और बड़वानी गांव भी पूर्णतया ऐसी ही स्थिति में पहुंच न जाएं। उनका यह भी कहना है कि जिला अधिकारी भारत सरकार को एक प्रस्ताव भेजे जिसमें केल्झिरी की सफलता की चर्चा की जाए और उसे मान्यता मिले। डीएफओ उत्तम शर्मा ने भी ऐसे ही विचार प्रकट किए। उन्होंने वन संरक्षा समिति की कामयाबियां गिनाईं और कहा कि अजमारा नदी पर बनाया गया बांध सिंचाई का भरोसेमंद साधन बन गया है। गांव की कुल 74,000 हेक्टेयर भूमि में से लगभग 50,000 हेक्टेयर की सिंचाई इसी से की जाती है। कम से कम 18 कुएं भी खोदे गए हैं जो सिंचाई के काम आते हैं। हर किसान दो-दो फसलें उगाता है।

‘‘स्वास्थ्य और सफाई से जुड़े मुद्दों पर लोगों को शिक्षित करने के लिए विशेष अभियान शुरू करने में हम अधिकारियों की मदद कर रहे हैं। अगला कदम है। पक्के मकान बनाना।’’ यह कहना है बी.के. सिंह का। वह होशंगाबाद के मुख्य वन कंजर्वेटर हैं। उन्होंने केल्झिरी को एक आदर्श गांव बताया जिसने साफ-सफाई में एक मिसाल कायम की है। गांव के अमरलाल और उनके मित्रों को इस पर नाज है।

साभार- योजना, जनवरी 2013

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