तुमड़ीबोड़ गाँव ने हमें दिखाई स्वच्छ राह

Ramesh Kumar
Monday, January 19, 2015 - 11:44

जॉन राजेश पॉल

 

सोचा, कर दिखाया और मिसाल बन गया एक गाँव। हमारे शहरों को सीख दे रहा राजनाँद गाँव जिले के दो गाँव। जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर तुमड़ीबोड़ और दीवानभेड़ी की महिलाओं ने गन्दगी और प्लास्टिक के खिलाफ अपने दम पर अभियान छेड़ दिया है।

आज नहीं प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के ऐलान करने से पहले। जहाँ प्लास्टिक का कचरा दिखता है, खुद उठाती हैं जमा करती हैं और साप्ताहिक बाजार में बेचती हैं। अब तो गाँव में कानून भी बना दिया। जो कचरा फैलाता हुआ मिलेगा, उस पर 50 रुपए का जुर्माना। मतलब सफाई की सफाई और कमाई की कमाई। सफाई अभियान का असर ये है कि अब कचरा दिखता है तो गाँव का कोई भी आदमी खुद ही उठाकर नियत स्थान पर रख देता है।

पीएम के अभियान से पहले

प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त 2014 को स्वच्छ भारत अभियान का ऐलान किया था। पर तुमड़ीबोड़ की महिलाओं ने 6 जुलाई को ही अपने गाँव में अभियान छेड़ दिया था। सुसन स्वच्छ भारत अभियान से तालमेल होने की बात पर कहती हैं- यह प्रतियोगिता की बात नहीं है, गर्व की बात है। जब तक हमारे गाँव से पूरे डोंगरगढ़ ब्लॉक और राजनाँद  गाँव जिले में यह मिशन नहीं फैलेगा, अभियान जारी रहेगा।

ऐसे शुरू हुआ गाँव में कारवाँ

गाँव से 15 साल पहले शादी के बाद सुसन राज पूना चली गई थीं। वो अपने बच्चों के साथ वापस गाँव में आकर बस गईं। देखा कि प्लास्टिक खाने से 14-15 मर गए। जगह-जगह पॉलीथिन का कचरा भी था। सुसन को ये नागवार गुजरा। वो घर से निकली। खुद ही एक-एक कचरा उठाने लगी। शुरू में कुछ लोग हँसे, आलोचना की, पर धीरे-धीरे सब बदला। साथ देने वाले बढ़े। दो, दो से चार, चार से आठ और अब पूरा गाँव।

 

छत्तीसगढ़ के राजनाँद गाँव में महिलाओं का संकल्प न पॉलीथिन, न कचरा, गन्दगी पर 50 रुपए जुर्माना

बढ़ता गया सफर एक गाँव से दो गाँव

असर ये रहा पास की दीवानभेड़ी की महिलाओं ने इसे शुरू कर दिया और अपने गाँव में भी यही फार्मूला लागू कर दिया। इसमें सरस्वती स्वयं सहायता समूह, माँ शीतला स्वयं सहायता समूह, पदमाजय माँ विंध्यवासिनी समूह, माँ भानेश्वरी समूह आदि भी जुड़ गए हैं। तकरीबन 200 महिलाएं काम कर रही हैं।

हर रविवार को इकट्ठे होते हैं लोग

हर रविवार को गाँव की महिलाएं और बच्चे इकट्ठे होते हैं। साथ में बैनर- गाय को बचाओ-लक्ष्मी को उठाओ। मकसद सफाई। दस्ताने पहनकर बोरों में पॉलीथिन, प्लास्टिक, डिब्बे, बोरी इत्यादी भरकर कांजी हाउस में रखते हैं। सोमवार को साप्ताहिक बाजार में इसे फारूख कबाड़ी को बेचा जाता है।

मन्दिर के लिए बनेंगी कपड़े की थैलियाँ

महिलाएं गाँव में पॉलिथिन की जगह कपड़े की थैलियों के उपयोग करने के लिए लोगों को जागरूक कर रही हैं। डोंगरगढ़ के सुप्रसिद्ध माँ बम्लेश्वरी मन्दिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए तुमड़ीबोड़ की पद्मश्री शान्ति महिला समूह ने कपड़े की थैलियाँ बनाकर देने का प्रस्ताव जिला प्रशासन को दिया है। अध्यक्ष रशीदा बी ने थैलियों के नमूने तैयार किए हैं। बम्लेश्वरी के दर्शन के लिए हर साल करीब 10 लाख भक्त आते हैं। इससे रोजगार भी मिलेगा, प्रदूषण भी नहीं होगा। जिला प्रशासन के जवाब का इन्तजार है।

साभार : दैनिक भास्कर 19 जनवरी 2015

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