शौचालय और स्वच्छता सुविधाएँ सस्ती, टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण होनी चाहिए: डॉ. आर. ए. माशेलकर

Sunday, December 6, 2015 - 13:37

शौचालय और स्वच्छता सुविधाएँ सस्ती, टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण होनी चाहिए: डॉ. आर. ए. माशेलकर

 

पुणे: जाने-माने वैज्ञानिक और पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय, भारत सरकार की तकनीकी विशेषज्ञ समिति के चैयरमेन डॉ. आर. ए. माशेलकर ने पुणे में 27 नवम्बर को आयोजित दूसरे इंडिया सीएसआर,सेनिटेशन समिट में कहा कि स्वच्छता सुविधाएँ सस्ती, टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण होनी चाहिए। पूरे देश में बहुत ही कम समय में 12 करोड़ शौचालयों का निर्माण किया जाना है।

 

उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य मात्र शौचालय बनाना नहीं अपितु उन्हें कई वर्षों तक प्रयोगशील बनाना है। इसके लिए शौचालय इंजीनियरिंग नहीं अपितु सामाजिक और तंत्र इंजीनियरिंग होनी चाहिए। सामाजिक नवाचार द्वारा अनुशंसित सुझाव बड़े पैमाने पर लोगों की मानसिकता में परिवर्तन लाएगा जिससे समाज कम समय में शौचालय उपयोग करना सीख सके।

 

लगभग 200 शौचालय एवं स्वच्छता तकनीक आविष्कारकों, शोधकर्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, कॉरपोरेट फाउंडेशन के प्रतिनिधियों और थिंक टैंकों को दूसरे वैश्विक स्वच्छता सेमिनार में सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हमें उन्नत तकनीक का प्रयोग कर सस्ते, गुणवत्तापूर्ण, स्थायी शौचालय सुविधाएँ लोगों तक पहुँचानी है। सस्ती उत्कृष्ट तकनीक के जरिए हमारा विचार स्वच्छ भारत अभियान की मदद करना है। उन्होंने इंडिया सीएसआर के मिशन की सराहना करते हुए कहा कि इसकी वजह से कई हितधारक एक मंच पर साथ आ सके हैं। कार्यक्रम में नवीन आविष्कारकों को जिन्होंने टिकाऊ, नवीन तकनीक, सस्ते शौचालय डिजाइनों का निर्माण या निर्माण में कोई भूमिका निभाई को सम्मानित किया।

 

डॉ. माशेलकर ने अपने शुम्भारम्भ सम्बोधन में कहा कि उन्नत प्रौद्योगिकी स्वच्छता के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इस तकनीक का सस्ता होना इसलिए जरूरी है क्योंकि हमारे आर्थिक संसाधन राज्य, राष्ट्रीय और व्यक्ति स्तर पर सीमित हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हमारे पास समय बहुत कम है। इतने कम समय यानी 2 अक्टूबर 2016 तक हमें 12 करोड़ शौचालयों का निर्माण करना है।

 

औद्योगिक अनुसंधान परिषद के पूर्व प्रमुख डॉ. माशेलकर ने कहा कि सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय ने उनकी अध्यक्षता में एक 19 सदस्यों की एक समिति गठित की है। इस समिति में तकनीकी विशेषज्ञ से लेकर समाजिक विशेषज्ञ तक, अकादमिक से लेकर स्वयंसेवी संस्थाओं तक के प्रतिनिधि हैं। यह समिति सही दिशा में काम कर रही है और इसका दृष्टिकोण हमेशा सस्ते, टिकाऊ, स्थायी और समाज द्वारा अपनाए जाने वाले शौचालयों के निर्माण पर रहता है। मंत्रालय शुरू से ही सिर्फ शौचालयों की दर में वृद्धि पर नहीं अपितु अच्छे शौचालय निर्माण पर ध्यान दे रहा है। हम कम पानी वाले शौचालय की जगह बिना पानी वाले शौचालय की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं लेकिन इसके डिजाइन, विकास और फैलाव के विषय में दुबारा सोचने की जरूरत है। मैं स्वच्छ भारत अभियान को गन्दगी और कूड़े से जंग लड़ने की वजह से दूसरे स्वतंत्रता संग्राम की तरह देखता हूँ। यह बीमारियों से हमें मुक्ति दिलाएगी क्योंकि स्वच्छ भारत में ही स्वस्थ भारत निहित है। इस कार्यक्रम में 62,000 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

 

मैं अपने स्तर पर सदैव भारतीय आविष्कार के विषय में सोचता हूँ। दिल्ली में सरकार ने भारतीय आविष्कारों की प्रदर्शनी और चर्चा का दो दिन का कार्यक्रम रखा था। इसकी 3 कड़ियाँ आयोजित की जा चुकी हैं जबकि दिसम्बर- 2015 में इसकी चौथी कड़ी आयोजित की जाएगी। स्वच्छ भारत अभियान एक जनांदोलन बन चुका है। मैं इसे स्वच्छ भारत आंदोलन से बढ़कर, स्वच्छ भारत जनांनदोलन बनते हुए देख रहा हूँ। इस अभियान के विविध पहलू हैं। इससे लोगों में जागरुकता और सामाजिक परिवर्तन हुए हैं। यह अभियान 125 करोड़ भारतीयों की मानसिकता में बदलाव की माँग करता है। उन्होंने कहा कि खुले में शौच से उन्मूलन, मैला प्रथा को खत्म करना और नागरिकों को स्वच्छता के प्रति जागरुक करना इस अभियान में शामिल है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महात्मा गाँधी की 150वीं जयंती तक स्वच्छ भारत के लक्ष्य को पूरा करना है। शौचालय निर्माण स्वच्छ भारत का एक पहलू है। इसका लक्ष्य 2019 तक देश को खुले में शौच मुक्त करना है। पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार गाँव के हर घर में एक शौचालय होना व उसका 100 प्रतिशत उपयोग होना जरूरी है।

 

कार्यक्रम में कई कंपनियों को स्वच्छ भारत सम्मान से नवाजा गया। सेमिनार में कई प्रतिष्ठित जैसे राजेन्द्र जगताप, आईएएस, सहायक नगर आयुक्त, पुणे नगरपालिका, अमित मित्तल, ए टू जेड के प्रबंध निदेशक, एडवोकेट चेतन गाँधी, पीएम शाह फाउंडेशन, निदेशक, स्वप्निल, समग्र, आदित्य बोरकर, सीईओ, बोरकर पॉलीमर, शिवा बालीवाद, नैनो तकनीक, सीईओ आदि जैसे कई लोगों ने हिस्सा लिया।

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