पोती की माँग पर निःशक्त दादा ने बनवाया शौचालय

Friday, November 6, 2015 - 13:21

राजु कुमार

 

स्वच्छता अभियान के तहत व्यक्तिगत शौचालय बनाने की मुहिम में कई मुश्किलें भी आती हैं, पर कई ऐसे वाकिये भी देखने को मिलते हैं, जिसमें शौचालय बनाने में टाल-मटोल करने वाला परिवार सहजता से आगे बढ़कर शौचालय बनवा लेता है। ऐसा ही एक वाकिया सीहोर जिले के इछावर विकासखण्ड के मूंडला कलाँ गाँव में देखने को मिला। पैसे की कमी और निःशक्तता के कारण शौचालय बनाने में अरुचि दिखाने वाले बुजुर्ग विजय सिंह ने अपनी पोती रिया के कहने पर कुछ ही दिनों में शौचालय बनवा लिया।

 

रिया बहुत ही छोटी बच्ची है। वह गाँव की शाला में दूसरी कक्षा में पढ़ती है। जब गाँव में निर्मल भारत अभियान के तहत व्यक्तिगत शौचालय बनवाने की मुहिम चल रही थी, तब स्वयंसेवी संस्था, पंचायत एवं समुदाय स्तर पर कई उपाय किए जा रहे थे, जिसकी बदौलत छोटे बच्चे भी स्वच्छता के बारे में कुछ-कुछ समझने लगे। स्कूल में बच्चों को बाल सभा एवं अन्य गतिविधियों के माध्यम से स्वच्छता के बारे में सन्देश दिए जा रहे थे। गाँव में स्वच्छता पर बच्चों की रैली निकाली गई। बच्चे अपने घर पर शौचालय बनाने की माँग करने लगे। रिया भी उन्हीं में से एक थी।

 

यूनिसेफ, मध्यप्रदेश के प्रमुख श्री ट्रेवर डी. क्लार्क कहते हैं, ‘‘स्वच्छता का मुद्दा बच्चों के जीने के अधिकार से जुड़ा हुआ है। बच्चों द्वारा शौचालय की माँग एक सकारात्मक पहलू है। समुदाय, सरकार एवं संस्थाओं द्वारा उनकी माँग को प्राथमिकता के साथ पूरा करना चाहिए। स्वच्छता सुविधाओं के अभाव में डायरिया, निमोनिया एवं अन्य बीमारियाँ होती हैं, जिससे कि बड़ी संख्या में बच्चों की मृत्यु होती है। हमें इन्हें रोकने के लिए स्वच्छता सुविधाओं को बढ़ाना होगा।’’

 

स्वच्छता के लिए चलाए जा रहे अभियान के बीच एक दिन रिया घर पर बहुत डरी हुई थी। स्कूल की छुट्टियाँ होने पर रिया अपने मामा के घर जाने वाली थी। रिया ने उस दिन मासूमियत से दादा से सवाल किया, ‘‘दादाजी अब हम शौचालय के लिए कहाँ जाएँगे? हमारे घर में शौचालय नहीं है और लोग शौच के लिए अब हमें बाहर नहीं जाने देंगे। शौच के लिए बाहर जाने पर जुर्माना लगेगा और पिटाई भी होगी।’’ रिया के इस डर को देखकर विजय सिंह ने उससे वायदा किया कि वह मामाजी के घर जाकर खुशियाँ मनाए और जब वह वापस लौटेगी, तब तक घर में शौचालय बन जाएगा।

 

रिया के मन में शौचालय बनाने को लेकर इस कदर जुनून पैदा होने के पीछे कई कारण रहे। स्कूल में लगातार गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को स्वच्छता के महत्व को बताने, गाँव के चौकीदार प्रेम सिंह द्वारा सीटी बजाकर और डोंडी पीटकर घोषणा करने और क्षेत्र में कार्यरत स्वैच्छिक संस्था समर्थन द्वारा रात्रि चौपाल में स्वच्छता पर फिल्में दिखाने का गहरा असर रिया पर पड़ा। चौकीदार बार-बार यह एलान कर रहा था कि जिनके घर में शौचालय हैं, वे शौचालय का उपयोग करें और जिनके घर में शौचालय नहीं हैं जल्द से जल्द बनवा लें। ऐसा नहीं करने पर एक महीने बाद पंचायत बाहर शौच करने वालों पर जुर्माना करेगी। स्वच्छता पर बनी फिल्मों में भी जब जुर्माना और लाठी लेकर खुले में शौच वाले स्थानों पर निगरानी करना दिखाया गया, तब रिया को लगा कि उसके गाँव में भी ऐसा ही कुछ होगा।

 

रिया ने बताया, ‘‘मैं फिल्म देखने के बाद डर गई थी कि शौच के लिए हम कहाँ जाएँगे? हमने दादा को बताया, तो उन्होंने शौचालय बनाने की मेरी माँग मान ली।’’ विजय सिंह जल्द ही शौचालय नहीं बनवाना चाहते थे, पर रिया की बातों ने उन पर गहरा असर किया। वे शौचालय बनाने का रिया से वायदा कर चिंतित हो गए क्योंकि उनका दायाँ हाथ नहीं है। पंचायत के उप सरपंच कैलाश पटेल याद करते हैं, ‘‘अपनी पोती के लिए निःशक्तता को भूलकर विजय सिंह ने एक हाथ से ही दो गड्ढों की खुदाई कर दी। जब उन्हें शौचालय के लिए संस्था एवं पंचायत से मदद मिली, तो वे राजमिस्त्री के साथ काम में लगे रहे ताकि रिया के आने पर उससे किया हुआ वायदा पूरा हो जाए।’’

 

रिया जब मामा के घर से वापस आई, तो घर में शौचालय देखकर बहुत खुश हुई। उसने यह बात स्कूल में सहेलियों को भी बताई। रिया बताती है, ‘‘मेरे दादा मुझे बहुत प्यार करते हैं। उन्होंने शौचालय बना दिया है, तो मुझे किसी से डर नहीं है। अब मैं कभी भी बाहर शौच के लिए नहीं जाती हूँ।’’

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